मामला 2016 में फतेहगढ़ साहिब में हुए सड़क हादसे का है जिसमें हरजिंदर सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और उन्हें करीब 65 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता हो गई। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने उन्हें 20 लाख रुपये मुआवजा दिया था।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सड़क दुर्घटना मामलों में एफआईआर दर्ज करने में देरी अपने आप में मुआवजा दावा खारिज करने का आधार नहीं हो सकती।
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अदालत ने कहा कि हादसे के बाद प्राथमिकता इलाज को दी जाती है और ऐसे में एफआईआर दर्ज कराने में देरी स्वाभाविक है।
कोर्ट ने एक पीड़ित को राहत देते हुए मुआवजा बढ़ाकर करीब 60 लाख रुपये करने का आदेश दिया। मामला 2016 में फतेहगढ़ साहिब में हुए सड़क हादसे का है जिसमें हरजिंदर सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और उन्हें करीब 65 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता हो गई। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने उन्हें 20 लाख रुपये मुआवजा दिया था। इस पर पीड़ित ने मुआवजा बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट में अपील की।
बीमा कंपनी ने दलील दी कि एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई और पीड़ित नौकरी पर लौट आया इसलिए मुआवजा बढ़ाना उचित नहीं है। हालांकि हाईकोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि नौकरी पर लौटने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति की आय क्षमता पूरी तरह बहाल हो गई। अदालत ने माना कि पीड़ित पहले जैसी दक्षता से काम नहीं कर पा रहा इसलिए मुआवजा बढ़ाना जरूरी है।