जालंधर में बरसात के दौरान बिजली का तार गिरने से करंट की चपेट में आकर पिता- पुत्र की मौत मामले में मुआवजे को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा है कि क्या सरकार या सरकारी मशीनरी की लापरवाही से हुए हादसे की स्थिति में मुआवजे का कोई प्रावधान है।
याचिका में बताया गया कि गुलशन जालंधर में एक दुकान में काम करता था। गत 10 जुलाई को उसका 13 साल का बेटा उसके पास आया था। रात को जब दोनों दुकान से वापस जा रहे थे तो अचानक बारिश होने लगी। बारिश के दौरान बिजली का तार टूटकर पानी में गिर गया, जिससे पानी में करंट दौड़ उठा और उसकी चपेट में आकर पिता- पुत्र तड़पने लगे।
लोगों ने लाठी से बिजली का तार हटाया और दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन पिता और पुत्र दोनों की मौत हो गई। पुलिस ने प्राकृतिक आपदा बताते हुए हादसे से पल्ला झाड़ लिया और कहा कि इसमें पुलिस कार्रवाई की कोई आवश्यकता नहीं है।
बच्चे की मां ने दाखिल की है याचिका
इस मामले में गैर सरकारी संगठनों की सहायता से 13 वर्षीय बच्चे की मां ने मुआवजे के लिए उच्च न्यायालय से गुहार लगाई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब के गृह सचिव, जालंधर के पुलिस आयुक्त, थाना 4 प्रभारी, पीएसपीसीएल के चेयरमैन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही न्यायालय ने पंजाब सरकार से पूछा है कि क्या राज्य या राज्य की मशीनरी की नाकामी के कारण हुए हादसे के लिए मुआवजे का प्रावधान है।