चंडीगढ़। मंदिरों के सुधार के लिए श्राइन बोर्ड बनाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने श्राइन बोर्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित विभिन्न आदेशों की प्रति कोर्ट में सौंपने का आदेश दिया है। हरियाणा सरकार इससे पहले बता चुकी है कि श्राइन बोर्ड के माध्यम से मंदिरों के उत्थान का कार्य किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश रिकाॅर्ड पर रखने के लिए हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट से कुछ मोहलत मांगी है, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।
राम मूर्ति व अन्य ने हरियाणा सरकार द्वारा श्राइन बोर्ड की परिभाषा बदलते हुए कालका के सारे मंदिरों का अधिग्रहण करने के फैसले को चुनौती दी थी। इस दौरान पूर्व की हुड्डा सरकार पर आरोप लगाया गया था कि सरकार ने मंदिर को अपने चहेतों को नौकरी देने का जरिया बना दिया है। यहां पर ज्यादातर नियुक्तियां सरकार के करीबियों की होती हैं। बोर्ड ने कहा था कि बीते तीन साल में जितना विकास हुआ है, उतना पूर्व में कभी नहीं हुआ। इससे पहले हरियाणा सरकार ने कालका स्थित कालका देवी के मंदिर के अधिग्रहण पर स्थिति स्पष्ट कर कहा था कि इस मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर वहां का प्रबंधन गंभीर नहीं है। यहां हजारों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। हलफनामे में कहा गया है कि इस मंदिर की हर साल की इनकम 50 लाख के करीब है, लेकिन अभी तक किसी भी प्रकार का कोई भी एकाउंट नहीं खोला गया है। हाईकोर्ट ने इसपर श्राइन बोर्ड को सवालों के घेरे लेते हुए उनसे उनके बारे में जानकारी मांग ली थी। याचिका मेंं हरियाणा सरकार की 8 अगस्त 2010 और 22 अगस्त 2010 की अधिसूचना को रद्द करने का आग्रह किया गया है। जिसके जरिए श्राइन बोर्ड अधिसूचना के तहत माता काली देवी मंदिर और उसके प्रबंधन के बंदोबस्त को हरियाणा सरकार ने अंडरटेक किया था।