कैबिनेट मंत्रियों की संख्या निर्धारित से अधिक होने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि यदि विधायकों को रैंक इतनी ही पसंद है तो सभी को चीफ मिनिस्टर का रैंक क्यों नहीं दे देते। सरकार की अप्रोच है से तो ऐसा लगता है कि उसका बस चले तो सीएम को गवर्नर का रैंक दे दे। इसी दौरान अब चीफ व्हिप का पद भी हाईकोर्ट के राडार पर आ गया। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि चीफ व्हिप तो पार्टी की ओर से नियुक्ति किया जाता है तो उसे सुविधाएं किस आधार और कानून के तहत मुहैया करवाई जाती हैं।
राजनीतिक नियंत्रण के पद के लिए राज्य सरकार की ओर से क्यों भुगतान हो रहा है। हरियाणा सरकार को अगली सुनवाई पर इस बारे में अपना पक्ष रखना होगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याची से इस मुद्दे पर अगली बार पूरी तैयार के साथ आने को कहा है। मामले में याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट जगमोहन सिंह भट्टी ने कहा कि हरियाणा में कैबिनेट मंत्रियों की संख्या वर्तमान में 14 है।
नियमों के मुताबिक कुल विधायकों की संख्या 90 है और ऐसे में अधिकतम मंत्री 13.5 हो सकते हैं। बावजूद इसके कुछ समय पूर्व एडवोकेट जनरल को कैबिनेट रैंक और विधायक ज्ञान चंद गुप्ता को राज्य मंत्री का दर्जा दे दिया गया। याची ने कहा कि हरियाणा सरकार की ओर से जो मंत्रीपद और कैबिनेट रैंक बांटी जा रही है, उसका सीधा दबाव जनता पर पड़ रहा है। विधायकों को खुश करने के लिए ऐसी रैंक बांटी जाती है और उनको भुगतान जनता की गाढ़ी कमाई से किया जाता है।
याची ने हाईकोर्ट से अपील करते हुए कहा कि तय संख्या से अधिक मंत्री होने के चलते अतिरिक्त मंत्रियों को हटाया जाए। इसके साथ ही याचिका लंबित रहते उनको मिलने वाले लाभ पर रोक लगाई जाए। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि पदों और रैंक के मामले में क्यों उलझा जा रहा है।