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हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को लगाई फटकार, कहा, विधायकों को रैंक की चिंता तो सबको सीएम का रैंक दे दें

Tue, 18 Apr 2017 09:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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कैबिनेट मंत्रियों की संख्या निर्धारित से अधिक होने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि यदि विधायकों को रैंक इतनी ही पसंद है तो सभी को चीफ मिनिस्टर का रैंक क्यों नहीं दे देते। सरकार की अप्रोच है से तो ऐसा लगता है कि उसका बस चले तो सीएम को गवर्नर का रैंक दे दे। इसी दौरान अब चीफ व्हिप का पद भी हाईकोर्ट के राडार पर आ गया। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि चीफ व्हिप तो पार्टी की ओर से नियुक्ति किया जाता है तो उसे सुविधाएं किस आधार और कानून के तहत मुहैया करवाई जाती हैं। 
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राजनीतिक नियंत्रण के पद के लिए राज्य सरकार की ओर से क्यों भुगतान हो रहा है। हरियाणा सरकार को अगली सुनवाई पर इस बारे में अपना पक्ष रखना होगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याची से इस मुद्दे पर अगली बार पूरी तैयार के साथ आने को कहा है। मामले में याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट जगमोहन सिंह भट्टी ने कहा कि हरियाणा में कैबिनेट मंत्रियों की संख्या वर्तमान में 14 है।

नियमों के मुताबिक कुल विधायकों की संख्या 90 है और ऐसे में अधिकतम मंत्री 13.5 हो सकते हैं। बावजूद इसके कुछ समय पूर्व एडवोकेट जनरल को कैबिनेट रैंक और विधायक ज्ञान चंद गुप्ता को राज्य मंत्री का दर्जा दे दिया गया। याची ने कहा कि हरियाणा सरकार की ओर से जो मंत्रीपद और कैबिनेट रैंक बांटी जा रही है, उसका सीधा दबाव जनता पर पड़ रहा है। विधायकों को खुश करने के लिए ऐसी रैंक बांटी जाती है और उनको भुगतान जनता की गाढ़ी कमाई से किया जाता है।  
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याची ने हाईकोर्ट से अपील करते हुए कहा कि तय संख्या से अधिक मंत्री होने के चलते अतिरिक्त मंत्रियों को हटाया जाए। इसके साथ ही याचिका लंबित रहते उनको मिलने वाले लाभ पर रोक लगाई जाए। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि पदों और रैंक के मामले में क्यों उलझा जा रहा है। 
 
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हरियाणा सरकार को फटकार
एजी को कैबिनेट रैंक की जरूरत ही नहीं है क्योंकि यदि व्यवस्था के लिहाज से देखें तो वह उससे भी बड़ा पद है। ज्ञान चंद गुप्ता को मंत्री पद देकर सरकार ने संविधान के 91वें संशोधन का उल्लंघन किया है। इस संशोधन के तहत राज्य में मंत्री परिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।

हरियाणा सरकार ने कहा कि ज्ञान चंद गुप्ता को केवल सुविधाएं दी गई हैं, मंत्री का दर्जा नहीं दिया गया है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर किस कानूनी अधिकार से उन्हें सुविधाएं दी जा रही हैं।

हरियाणा सरकार ने कहा कि अन्य राज्यों में भी ऐसी सुविधाएं दी जाती हैं और इन्हें मंत्रियों में नहीं गिना जाता है। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी पद को लाभ देने के लिए कोई कानूनी अधिकार जरूरी है और अगली सुनवाई पर इस बारे में हरियाणा सरकार विस्तार पूर्वक जवाब दाखिल करे। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पूछा कि जब अधिकतम मंत्री 15 प्रतिशत से अधिक न होने की शर्त है और हरियाणा के मामले में यह संख्या 13.5 बनती है तो 13 मंत्री न बनाकर 14 क्यों बनाए गए।
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