आईएएस की तैयारियों और थिएटर की रिहर्सलों के बीच संतुलन साधने की जद्दोजहद में जुटी एक लड़की ने आज से 30 साल पहले कुछ ऐसे नजारे देखे थे जिन्होंने एक उभरती अभिनेत्री के जीवन में राजनीति की पटकथा लिख डाली। मंच की कहानियों को सुनाती-जीती वह लड़की आज देश की एक आला दर्जे की एक्ट्रेस तो है ही, साथ ही अपने चंडीगढ़ शहर की सांसद भी है।
किरण खेर शनिवार को सिटी ब्यूटीफुल में अमर उजाला के रूपांतरण कार्यक्रम में मौजूद थीं और एमसीएम डीएवी कॉलेज के आडिटोरियम में मौजूद हजारों महिलाओं को अपना दिल खोलकर दिखा रही थीं। उन्होंने रूपांतरण क्लब सदस्याओं को बताया कि सन 84 के दंगों को वह अपनी जिंदगी के अहम मोड़ों में गिनती हैं।
बैडमिंटन स्टार बनने के बारे में सोचती थीं
किरण खेर ने कहा कि उससे पहले वह या तो अपनी बहन की तरह बैडमिंटन स्टार बनने के बारे में सोचती थीं या फिर बलवंत गार्गी जी के ग्रुप के साथ अभिनय के अहसासों में डूबी रहती थीं। उन्हीं दिनों 84 के दंगों के मंजर उभरे और वे सोचने लगीं कि अगर चीजें राजनीति से ही बदलती हैं तो राजनीति को क्यों नहीं समझना चाहिए!
गौरतलब है कि इन दिनों किरण खेर के ही अभिनय से सजी फिल्म 'पंजाब 1984' सिनेमाघरों में चल रही और उसमें अभिनय के लिए उनकी जमकर तारीफ हो रही है।
औरत की जिंदगी मां बनकर ही मुकम्मल होती है
किरण खेर ने रूपातंरण परिवार के साथ बिताई इस दोपहर में, और भी कई अंतरंग पल साझा किए।
उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी के एमए इंग्लिश वाले दिनों को याद किया, बलवंत गार्गी थिएटर ग्रुप को मुड़कर देखा, कॅरियर की शुरुआती फिल्में और टीवी शोज याद किए और साथ ही यह भी बताया कि बेटे सिकंदर केजन्म को भी वे जिंदगी का अहम मोड़ मानती हैं क्योंकि औरत की जिंदगी मां बनकर ही मुकम्मल होती है।
एक दूसरे संदर्भ में, उन्होंने कहा कि औरत का सच्चा गहना उसका आत्मविश्वास है। यह बहुत जरूरी है कि महिलाएं अपने घरेलू जीवन से फुर्सत निकाल कर दोस्तों से मिलने जुलने का वक्त निकालें और जीवन को अपने तरीके से जीना शुरू करें।
मर्दों से हमदर्दी
परिहास के एक पल में, किरण ने मर्दों से हमदर्दी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें पुरुषों पर तरस आता है क्योंकि वे औरतों की तरह श्रृंगार नहीं कर सकते।
औरतों के पास हजार तरह के गहने होते हैं और आदमियों के पास कलाई घड़ी और चश्मे के अलावा कुछ नहीं होता। जिंदगी जिंदादिली से जीने की अपील करते हुए किरण ने कहा कि खुद को सजाना संवारना अच्छी बात है, हिन्दुस्तान जैसे बहुरंगी मुल्क में पैदा होने के बाद भी जो औरत श्रृंगार नहीं करती, उस पर लानत है।
किरण खेर ने कार्यक्रम में आईं महिलाओं से अपील की कि वे रूपांतरण जैसे मंच का सदुपयोग करें और अपनी दोपहरों को सार्थक बनाएं। उन्होंने इस अवसर पर अमर उजाला रूपांतरण क्लब की सदस्यता भी ग्रहण की।