भारत-पाकिस्तान के बीच साल 1971 में हुई जंग के हीरो ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर उन्हें 10 एकड़ जमीन दिलाने के 21 साल पुराने मामले का जल्द निपटारा करने की मांग की है।
वीरता पर उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। उन्हें पंजाब सरकार से इनामी राशि मिली थी, लेकिन ऐसे ही पुरस्कार प्राप्त दो अन्य को 10-10 एकड़ जमीन दे दी गई थी।
ब्रिगेडियर चांदपुरी की बहादुरी पर फिल्म बॉर्डर भी बन चुकी है। सनी देओल ने फिल्म में उन्हीं की भूमिका अदा की थी। युद्ध में ब्रिगेडियर चांदपुरी की बहादुरी की वजह से ही केंद्र सरकार ने उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया था। इसी दौरान वर्ष 1976 में पंजाब सरकार ने नीति बनाई थी कि महावीर चक्र प्राप्त योद्धाओं को 30 हजार का इनाम या 10 एकड़ जमीन दी जाएगी।
चांदपुरी ने सरकार से जमीन मांगी थी, लेकिन सरकार ने कहा था कि जमीन नहीं है, लिहाजा ब्रिगेडियर चांदपुरी को इनामी राशि दी गई। उन्हें बाद में पता चला कि इनामी राशि प्राप्त करने वाले दो अन्य महावीर चक्र प्राप्त को राज्य सरकार ने 10-10 एकड़ जमीन भी दी है, जबकि उन्हें जमीन देने से इनकार कर दिया गया था।
इसी आधार पर उन्होंने याचिका दायर कर जमीन की मांग की थी। यह मामला अदालत में पिछले 21 साल से विचाराधीन है। अब उन्होंने सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता के माध्यम से अर्जी दाखिल कर जल्द सुनवाई की मांग की है। हाईकोर्ट ने सुनवाई जुलाई में करने का निर्देश दिया है।
लोक अदालत भी गया था केस:
हाईकोर्ट में जब याचिका दायर की गई तो पंजाब सरकार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि नीति के तहत ब्रिगेडियर चांदपुरी को 30 हजार रुपये की इनामी राशि दी जा चुकी है। ऐसे में उन्हें जमीन नहीं दी जा सकती। मामले में चांदपुरी ने सरकार से पेशकश की थी कि वह इनामी राशि ब्याज सहित लौटाने को तैयार हैं।
कहा था कि उन्हें भी अन्य दो महावीर चक्र प्राप्त लोगों की भांति जमीन दी जाए। मामले में कोई फैसला न हो पाने पर हाईकोर्ट ने मामला लोक अदालत में भेज दिया था। वहां भी पंजाब सरकार अपने स्टैंड पर अडिग रही। आखिरकार लोक अदालत ने पिछले साल अगस्त माह में मामला दोबारा हाईकोर्ट रेफर कर दिया था। इसी मामले की जल्द सुनवाई के लिए अर्जी दाखिल की गई है।