पंचकूला की ऐतिहासिक इमारत नाहन कोठी
- फोटो : अमर उजाला
पंचकूला के सेक्टर-12ए स्थित ऐतिहासिक इमारत नाहन कोठी पर अवैध कब्जे के चलते हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया। कोठी को संरक्षित स्मारक तो घोषित किया गया है, लेकिन लंबे समय से इस इमारत पर सरकारी विभाग ने ही अवैध तौर पर कब्जा करके अपना कार्यालय खोल रखा है। ऐतिहासिक धरोहर के प्रति हरियाणा सरकार के इस रवैये के खिलाफ एडवोकेट एचसी अरोड़ा द्वारा दायर याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस गुरमीत राम की डिवीजन बेंच ने वीरवार को सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार, सांस्कृतिक मामलों के विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, पंचकूला के डीसी, जिला उपभोक्ता फोरम और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को नोटिस जारी किया है।
मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी। एडवोकेट अरोड़ा ने याचिका में कहा है कि पंचकूला के सेक्टर-12ए में स्थित नाहन कोठी हरियाणा का राज्य संरक्षित स्मारक है। ऐसे में राज्य सरकार और जिला कलेक्टर की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे इस स्मारक को सुरक्षित और संरक्षित रखें। साथ ही, इस इमारत के किसी भी हिस्से पर अतिक्त्रस्मण की अनुमति न दें। याचिका में आगे कहा गया है कि इसके बावजूद, बीते कुछ सालों से जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम इस इमारत में कब्जा जमाए बैठा है और यह इमारत नष्ट होने के कगार पर पहुंच गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से इमारत के कुछ फोटोग्राफ भी कोर्ट के दिखाए गए, जिनमें इमारत की दीवारों में उग आए पीपल के पौधे दिखाई दे रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि ऐसे हालात में अगर इमारत का कोई हिस्सा धराशाही हुआ तो वहां बैठे फोरम के कर्मचारियों के जीवन को भी खतरा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सांस्कृतिक मामलों के विभाग ने ही उपभोक्ता फोरम के गैरकानूनी तरीके से इस इमारत में कार्यालय चलाने की अनुमति दी है। इसलिए यह इमारत तुरंत खाली कराई जाए।
153 साल पुरानी इमारत को मिला है संरक्षित स्मारक का दर्जा
पंचकूला सेक्टर-12ए स्थित नाहन कोठी 153 वर्ष पुरानी इमारत है, जिसे हरियाणा सरकार की ओर से संरक्षित इमारत का दर्जा दिया गया है। लाल रंग की यह कोठी महाराजा सिरमौर फतह प्रकाश के राजकुमारों सुरजन सिंह और बीर सिंह द्वारा बनवाई गई थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने भी 2007 में इस इमारत को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया था। इस इमारत में सरकारी विभाग चलाए जाने को लेकर इससे पहले भी एक याचिका स्थानीय निवासी मुंशी राम ने दायर की थी। उस याचिका पर वर्ष 2008 में हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को इस इमारत से सरकारी कार्यालय हटाने के आदेश दिए थे। लेकिन आदेश के आठ साल बीत जाने के बाद भी यह इमारत सरकारी कार्यालय बनी हुई है।