यदि बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लग रहा हो तो माता-पिता बसंत पंचमी के दिन विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की पूजा करें। ऐसा करने से बच्चे का मन पढ़ाई में लगेगा।
यह कहना है सेक्टर-30 के महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का। उनका कहना है कि बसंत पंचमी को मां सरस्वती की पूजा के लिए सुबह 7:16 बजे से शुभ मुहूर्त है।
उन्होंने बताया कि यदि बच्चे की विद्या में रुकावट, विघ्न एवं किसी तरह की बाधा हो तो माता-पिता मां सरस्वती की आरधना अवश्य करें।
उनका कहना है कि चार फरवरी दिन मंगलवार को माघ शुक्ल पंचमी को मनाया जानेवाला बसंत पंचमी को मां सरस्वती के पूजन का महत्व है।
भगवती सरस्वती विद्या, बुद्धि, राग, वाणी की अधिष्ठात्री देवी हैं। सर्वदा शास्त्र का ज्ञान देनेवाली है। मां भगवती का सरस्वती की उत्पत्ति सतोगुण से हुई है। उनकी अराधना एवं पूजा में श्वेतवर्ण की सामग्रियों का, जिसमें दूध, दही, मक्खन, धान का लावा, सफेद तिल का लड्डू, गन्ना एवं गन्ने का रस, मधु, श्वेत चंदन, सफेद पुष्प, सफेद वस्त्र का उपयोग होता है।
इस प्रकार करें मां की उपासना...
सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी लाल बहादुर दुबे और सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री के अनुसार मां भगवती सरस्वती की पूजा करनेवालों को माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सुबह उठकर स्नान करने के बाद गौरी गणेश की पूजा करने के बाद कलश पूजन करके मां की पूजा प्रारंभ करनी चाहिए। सर्वप्रथम मां सरस्वती का सफेद पुष्प लेकर ध्यान करें।
सेक्टर-15 स्थित जय श्री राम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख स्वामी राम बहादुर मिश्र और सेक्टर-32 के पुजारी अभय चंद्र झा एवं रवींद्र प्रसाद के अनुसार मां को सफेद पुष्प और सफेद वस्त्र का आसन देने के बाद जल दूध, दही, घी, शहद, पंचामृत से स्नान कराने के बाद जल से स्नान कराना चाहिए। सफेद चंदन लगाकर धूप दीप अर्पित करें। कलम, पुस्तक की पूजा के बाद मां की आरती करनी चाहिए। यदि स्वयं पूजा न कर पाएं तो किसी ब्राह्मण से पूजा करवाएं।
कब करें पूजा
बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार बसंत पंचमी के दिन मंगलवार को सुबह सात बजकर 16 मिनट के बाद मां की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त है। रेवती नक्षत्र में बसंत पंचमी मनाई जाएगी। इसका स्वामी बुध है जो विद्या, ज्ञान एवं वाणी के लिए शुभ ग्रह माना गया है। सिद्धि एवं साध्य योग में विद्या के लिए उपासना एवं ज्ञान की सिद्धि के लिए बहुत ही शुभ योग है। दोपहर बाद तीन बजे से साढ़े चार बजे तक राहु काल है। इस अवधि में पूजा निषेध है।