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चंडीगढ़ः सिख महिलाओं के लिए हेलमेट पहनने की अनिवार्यता खत्म करने में अभी फंसे हैं कई पेच

Sat, 13 Oct 2018 03:53 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हेल्मेट - फोटो : amar ujala
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एमएचए से सिख महिलाओं को हेलमेट पहनने में छूट देने के मामले में नोटीफिकेशन मिलने के बाद यूटी प्रशासन दबाव में आ गया है। प्रशासन अब अपने स्तर पर कानूनी जानकारी लेने के बाद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के पास फाइल भेजेगा। प्रशासक से अनुमति मिलने के बाद प्रशासन सिख महिलाओं को हेलमेट पहनने की अनिवार्यता को समाप्त करने का नोटिस जारी करेगा। इस पूरी प्रक्रिया में तकरीबन दो माह का समय लग जाएगा।  मिनिस्ट्री ऑफ अफेयर्स से एडवाइजरी मिलने के बाद यूटी प्रशासन में सिख महिलाओं को हेलमेट पहनने में छूट दिए जाने की कवायद शुरू हो गई है।
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इस संदर्भ में ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी डॉ. अजय सिंगला ने बताया कि देर रात एमएचए द्वारा जारी एडवाइजरी मिल गई है। अब नए सिरे से पूरे केस की स्टडी की जाएगी। पूर्व में जारी नोटीफिकेशन को निरस्त करने के लिए प्रोफेशनल्स की सलाह मांगी गई है। डॉ. सिंगला ने बताया कि सभी बिंदुओं पर विचार विमर्श करने के बाद ही फाइल को प्रशासक के पास भेजा जाएगा। इसके बाद प्रशासक स्तर पर फाइल की विवेचना होगी। वहां से अनुमति मिलने के बाद ही पूर्व में जारी नोटीफि केशन को निरस्त किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में अभी समय लग जाएगा।

एडवाइजरी मिलने के बाद बैकफुट पर प्रशासन
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने वीरवार को यूटी प्रशासन को एक एडवाइजरी जारी करते हुए यूटी प्रशासन को सलाह दी थी कि दिल्ली की तरह ही चंडीगढ़ में सिख महिलाओं को हेलमेट पहनने की अनिवार्यता में छूट दी जा सकती है। यूटी प्रशासन हेलमेट मामले में बैकफुट पर आने को तैयार नहीं है, लेकिन मंत्रालय से पत्र मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल हलचल शुरू हो गई। नई दिल्ली में वीरवार को पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल सहित एक प्रतिनिधि मंडल ने इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की, जिसके बाद गृह मंत्रालय की ओर से यह निर्देश जारी किया था।
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हाईकोर्ट में दाखिल जवाब से मिलेगी छूट की अनुमति  
महिलाओं के लिए हेलमेट अनिवार्य न होने को चुनौती देते हुए दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब और यूटी को फटकार लगाते हुए कहा कि क्या मौत लिंग देखकर आती है या कोई गारंटी है कि महिलाओं का एक्सीडेंट नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि सबकी जान की कीमत बराबर होती है महिलाओं की खोपड़ी पुरुषों से अलग नहीं होती। यूटी प्रशासन ने इस पर जवाब के लिए समय मांगा था। अब यूटी प्रशासन हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करेगी। उसी के अनुसार सिख महिलाओं को छूट दी जाए या फिर नहीं दी जाए, यह तय होगा।

प्रशासक को भेजी जाएगी फाइल
सिख महिलाओं को हेलमेट पहनने में छूट देने के मामले में मोटर वाहन अधिनियम अधिनियम 1993 के नियम 115 में संशोधन करने पर विचार करने जा रहा है। ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी डॉ. सिंगला ने बताया कि अधिनियम संशोधन के साथ ही कई बिंदुओं पर विचार चल रहा है। इसके लिए दिल्ली सहित कई राज्यों के मोटर वाहन अधिनियम की विस्तृत जानकारी लेने के लिए अधिकारियों को भेजकर अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मोटर वाहन नियम 1993 के उप नियम 115 में महिला शब्द की जगह सिख महिला शब्द डाला गया है। इस संदर्भ में होम सेेक्रेटरी अरूण कुमार गुप्ता ने बताया कि एमएचए से जो एडवाइजरी आई है, उसका अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद सभी की सहमति से उच्चस्तर पर एक्शन लिय जाएगा। पूरे मामले को ट्रांसपोर्ट विभाग अपने स्तर पर काम कर रहा है।
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