फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निगम चुनाव जीतीं, पर कमेटी चुनाव हारीं हीरा नेगी, कुछ इस तरह से हुई वोटिंग

Wed, 25 Jan 2017 04:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
चंडीगढ़ नगर निगम पार्षद हीरा नेगी
विज्ञापन
मेयर चुनाव में भारी बहुमत से जीतने के 12 दिन बाद ही 21 पार्षदों वाली भाजपा वित्त एवं अनुबंध कमेटी के चुनाव में हीरा नेगी के लिए छह वोट नहीं जुटा पाई। भाजपा में क्रासिंग वोट होने से कांग्रेस के उम्मीदवार दवेंद्र सिंह बबला छह वोट हासिल करने में कामयाब रहे। जबकि सदन में कांग्रेस के सिर्फ 4 ही पार्षद हैं। वित्त एवं अनुबंध कमेटी के 5 सदस्यों के लिए पार्षदों ने मतदान किया।
विज्ञापन


भाजपा के 4, मनोनीत का एक और कांग्रेस का एक उम्मीदवार मैदान में थे। लेकिन भाजपा अपनी ही गुटबाजी के कारण सिर्फ तीन उम्मीदवार ही जिता पाई। ऐसा भी कहा जा रहा है कि टंडन गुट की ओर से किरण गुट की उम्मीदवार मानी जा रहीं हीरा नेगी को हराया गया है । भाजपा ने जो 4 उम्मीदवार तय किए थे उनमें सांसद किरण खेर के दो करीबी पार्षदों को उम्मीदवार बनाया गया था। जिनमें खेर गुट के दूसरे उम्मीदवार कंवरजीत सिंह राणा चुनाव जीत गए हैं।

9 मनोनीत पार्षद भी भाजपा की सिफारिश से बने हैं। 4 वोट होने के बावजूद बबला की जीत से कांग्रेस का उत्साह बढ़ गया है। चुनाव हारने के बाद हीरा नेगी ने सदन में ही मेयर आशा जसवाल पर जमकर आरोप लगाए। हीरा नेगी ने आशा जसवाल से कहा कि ‘वह हारी नहीं हैं बल्कि उनके द्वारा हरवाई गई है।’ हीरा नेगी ने मेयर से कहा कि साल 2015 में भी उनके कारण ही वह मेयर का चुनाव नही जीत पाईं।
विज्ञापन


मालूम हो कि साल 2015 में सांसद किरण खेर ने हीरा नेगी को मेयर का उम्मीदवार बनाया था, जबकि टंडन गुट आशा जसवाल को उम्मीदवार बनवाना चाहता था। उस समय भी भाजपा पार्षदों की क्रास वोटिंग के कारण हीरा नेगी मेयर का चुनाव दो वोट से हार गई थीं।

पहले ही शंका जताई थी मेयर को

चंडीगढ़ नगर निगम पार्षद हीरा नेगी
हीरा नेगी ने सदन में कहा कि चुनाव से पहले ही मैंने आशा जसवाल से कहा था कि मेरे लिए जो छह वोट तय किए गए हैं, उनमें से एक वोट पड़ने पर शंका है। उस पार्षद को बदलने के लिए भी कहा था। इसके बावजूद बदलाव नहीं किया गया। जबकि मेयर चाहतीं तो उस पार्षद को दूसरे सदस्य के चुनाव में वोट डालने के लिए तय कर सकती थीं।

मालूम हो कि भाजपा ने अपने उम्मीदवार जितवाने के लिए मनोनीत के साथ बैठक कर आपस में छह-छह पार्षदों के वोट बांट लिए थे, ताकि पार्टी के 4 और मनोनीत पार्षद सदस्य का चुनाव जीत सकें। सूत्रों का कहना है कि हीरा नेगी ने पूर्व मेयर राज बाला मलिक पर शक जाहिर किया था। नेगी ने मलिक की जगह मनोनीत पार्षद सतप्रकाश अग्रवाल को छह वोट में शामिल करने की मांग की थी।

सतप्रकाश अग्रवाल भी सांसद किरण खेर की सिफारिश से ही मनोनीत पार्षद बने हैं। जबकि पूर्व मेयर राजबाला मलिक का कहना है कि अगर नेगी ने शक जाहिर किया तो मेयर को नाम बदलकर दूसरे पार्षद को वोट डालने की प्रस्तावित सूची में शामिल कर देना चाहिए था।
विज्ञापन

नेगी को इनमें से दो ने की क्रास वोटिंग

सांसद किरण खेर
नेगी के लिए मेयर की ओर से जो प्रस्तावित वोट तय किए गए थे उनमे भाजपा पार्षद महेश इंद्र सिद्धू, पूर्व मेयर राज बाला मलिक, चंद्रावती शुक्ला, फरमिला, सीनियर डिप्टी मेयर राजेश गुप्ता और खुद नेगी को शामिल किया गया था। ऐसे में नेगी को छह में से 4 वोट ही पड़े ऐसे में पार्टी मान रही है कि इन छह में से ही दो पार्षद ऐसे हैं जिन्होंने क्रास वोटिंग की है।

चौथे साल की मेयर उम्मीदवारी को जोड़ भी देख कर रहे है
कई नेता और पार्षद हीरा नेगी को हराने के पीछे चौथे साल में मेयर का उम्मीदवार बनने के साथ भी जोड़ रहे हैं। मालूम हो कि मेयर का कार्यकाल एक साल का होता है। चौथे साल में फिर से मेयर का पद महिला के लिए रिजर्व है।

उस समय के लिए राज बाला मलिक और हीरा नेगी को ही दावेदार माना जा रहा है। राज बाला मलिक भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन गुट की पार्षद हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि चुनाव हरवा कर हीरा नेगी को चौथे साल के मेयर पद के दावेदार की रेस से बाहर किया गया है।

खेर ने नहीं डाली वोट
सांसद किरण खेर भी नगर निगम की सदस्य हैं। लेकिन वह वोट डालने के लिए नहीं आईं। अगर वह आतीं तो एक वोट नेगी की बढ़ सकती थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें