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Chandigarh News: दिल का होगा बचाव, 30 साल के बाद नियमित कराएं बीपी की जांच

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चंडीगढ़। वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे के अवसर पर पीजीआई में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान डॉक्टरों ने मरीजों व उनके परिजनों को हाइपरटेंशन से बचाव के उपाय बताए। नमक के कम से कम सेवन के साथ ही 30 साल की उम्र के बाद नियमित रूप से छह माह में एक बार बीपी की जांच कराने की सलाह दी गई। न्यू आपोडी में अलग अलग विशेषज्ञों ने अपनी टीम के साथ मरीजों को बताया कि हाइपरटेंशन का लक्षण ज्यादातर मरीजों में सामने नहीं आता, लेकिन उसका दुष्प्रभाव अंदर से खोखला करता जाता है। ऐसे में जांच कर उसकी स्थिति की जानकारी लेकर समय पर बचाव किया जा सकता है। ऐसे होता है हाइपरटेंशन
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जिस समय दिल रक्त प्रवाह करने के बाद आराम की स्थिति में आता है, उस समय रक्त का दबाव बहुत कम हो जाता है। इस रक्त दबाव माप को प्रसारक (डायस्टोलिक) दबाव कहा जाता है। वयस्कों के लिए सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 एमएमएचजी माना जाता है। आमतौर पर 140/90 एमएमएचजी से अधिक ब्लड प्रेशर को वयस्कों के लिए हाई माना जाता है और 90/60 एमएमएचजी को कम माना जाता है।

ये कारण हैं जिम्मेदार

मोटापा, मधुमेह, व्यायाम न करना, आनुवांशिक, लगातार तनाव में रहना, धूम्रपान और थायराइड।

ये भी जान लें

सामान्य बीपी 120/80 से कम होना चाहिए। इससे ऊपर के स्टेज को प्री-हाइपरटेंशन कहते हैं। यदि बीपी 120 से 139, 80 से 89 के बीच है तो उस स्थिति में भी स्ट्रोक, किडनी, हृदयाघात, मधुमेह और आंखों की बीमारी बढ़ जाती है। 140/90 की स्थिति को हाइपरटेंशन कहते हैं, जो सबसे खतरनाक स्तर होता है।
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बीपी की जांच जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार 30 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को ब्लड प्रेशर चेक करवाना चाहिए। यदि सामान्य आता है तो हर छह महीने में चेक करवाते रहना चाहिए। किसी मरीज में प्री-हाइपरटेंशन का स्तर आता है तो वह डॉक्टर से संपर्क करें और हर महीने चेकअप करवाएं। बीपी चेक करने से आधा घंटा पहले चाय-कॉफी न पिएं और न धूम्रपान करें।

बचाव के लिए ये करें

- प्रतिदिन कम से कम 45 मिनट व्यायाम करें। इसमें ब्रिस्क वॉक, जॉगिंग, साइक्लिंग, स्वीमिंग, एरोबिक्स डांस को शामिल करें। वॉक में एक मिनट में 40-50 कदम, ब्रिस्क वॉक में एक मिनट में 75-80 कदम और जॉगिंग में 150-160 कदम चलना चाहिए।

- यदि तेज नहीं चल पाते हैं तो रोजाना कम से कम पांच किलोमीटर चलें। दिल के मरीज हैं तो एक्सरसाइज से पहले डॉक्टर से संपर्क करें।

- नमक की मात्रा कम करें। सलाद पर नमक न डालें। पापड़ खाने से बचें। दिनभर में आधा चम्मच से ज्यादा नमक न खाएं।

- वजन को नियंत्रण में रखें। वजन को चेक करते रहें।

- तनाव दूर करने के लिए अपने शौक को पूरा करने के लिए समय निकालें।

- फल और हाई-फाइबर वाली चीजें (गेहूं, ज्वार, बाजरा, जौ, दलिया, स्प्राउट्स, ओट्स, चना, दाल, ब्राउन राइस आदि) ज्यादा खाएं।

इससे कर लें तौबा

फास्ट फूड, तली-भुनी चीजें (समोसा, टिक्की, ब्रेड पकौड़े आदि), कोल्डड्रिंक, मीठी चीजें, चावल, मैदा, सैचुरेटेड फैट (देसी घी, वनस्पति, मक्खन, नारियल तेल) पैक्ड फूड (सॉस, अचार, चिप्स, कुकीज) के अलावा अंडे का पीला भाग, रेड मीट और फुल क्रीम दूध के सेवन से बचें।

ये अनदेखी हो सकती है आपके लिए खतरनाक

बिना डॉक्टर की सलाह खुद दवा बंद कर देना। नार्मल बीपी आने पर कुछ लोग दोस्तों व परिजनों की सलाह पर दवा नहीं लेते जबकि यह स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है। इससे ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। फॉलोअप में मरीज नहीं आते। कई बार दवा कम करनी होती है तो कई बार दवा बढ़ानी होती है इसलिए जरूरी है कि ब्लड प्रेशर होने पर डॉक्टर के संपर्क में रहें और चेकअप कराते रहें ताकि स्थिति गंभीर होने की नौबत ही न आए।
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