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चलती ट्रेन में चालक को अटैक, मौत

Fri, 04 Jul 2014 09:22 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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दिल्ली से कालका जा रही हिमालयन क्वीन के ड्राइवर को पानीपत के निकट चलती ट्रेन में ही दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। मुश्किल की इस घड़ी में सहायक चालक ने सूझबूझ दिखाते ट्रेन को रोक दिया, जिससे बड़ा हादसा बच गया। घटना के समय ट्रेन में लगभग 1700 यात्री सवार थे।
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ब्रेक लगाए जाने के बाद ट्रेन करीब आधा घंटा बीच ट्रैक पर ही रुकी रही। इस दौरान अप ट्रैक पर दौड़ रहीं शान-ए-पंजाब समेत कई ट्रेनें प्रभावित हुईं। रेलवे अधिकारियों ने ड्राइवर की व्यवस्था कर ट्रेन को गंतव्य के लिए रवाना किया। जीआरपी ने ड्राइवर के शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है।

हिमालयन क्वीन वीरवार सुबह 8.05 बजे पानीपत रेलवे स्टेशन से कालका के लिए निकली थी। ड्राइवर बृज मोहन सिंह (57) निवासी शेरा खुर्द अलीगढ़ ने 8.11 बजे सहायक चालक रितेश को छाती में दर्द होने की बात कही लेकिन एक मिनट बाद ही बृज मोहन सिंह अचेत होकर अपनी सीट पर लुढ़क गया।
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सहायक चालक ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत ट्रेन को रोक दिया। इस समय तक ट्रेन देवीलाल पार्क के नजदीक से गुजर रही थी। सहायक चालक रितेश ने ट्रेन को रोका और डाउन ट्रैक पर आ रही झेलम एक्सप्रेस को लाल झंडी देकर उसके ड्राइवर को मामले की जानकारी दी।

सहायक चालक रितेश ने ट्रेन के यात्रियों की मदद से चालक बृज मोहन को झेलम एक्सप्रेस से रेलवे स्टेशन पानीपत पहुंचाया। वहां जांच के बाद बृज मोहन को सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

2012 में भी हुई थी चालक की मौत
पानीपत में चलती ट्रेन में ड्राइवर की मौत होने का यह दूसरा मामला है। 11 फरवरी 2012 को एक ट्रेन ओवरसूट (सिग्नल पार ) कर गई थी, जिससे ड्राइवर तनाव में आ गया और बाबरपुर नाले पर चलती ट्रेन से कूद गया। इस घटना में ड्राइवर की मौत हो गई थी।
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