दिल्ली भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा को 6 जुलाई तक के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से अभयदान मिल गया है। पंजाब पुलिस 6 जुलाई तक न तो उन्हें गिरफ्तार करेगी और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करेगी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पंजाब पुलिस दिल्ली में बग्गा के घर जाकर उनके वकील की मौजूदगी में दो पूछताछ कर सकती है। पूछताछ करने के लिए गई टीम में तीन से ज्यादा अधिकारी नहीं होने चाहिए। इसके साथ ही सुबह दस से शाम पांच बजे के बीच किसी भी समय एक घंटे का समय पूछताछ के लिए हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस को दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट में चालान पेश करने पर भी रोक लगा दी है।
मंगलवार को जब इस मामले की सुनवाई आरंभ हुई तो पंजाब सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली ने कहा कि पंजाब सरकार इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करना चाहती है। हलफनामा दाखिल करने के लिए उन्हें कुछ मोहलत दी जाए ताकि उन पुलिस अधिकारियों के बयान हाईकोर्ट के समक्ष रखें जा सकें जो बग्गा को गिरफ्तार करने गए थे और दिल्ली व हरियाणा पुलिस ने जिन्हें बंधक बनाया था। इसके साथ ही पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट से अपील की कि दिल्ली के जनकपुरी थाने और कुरुक्षेत्र के थाने की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित की जाए ताकि साबित हो सके कि पंजाब पुलिस को बंधक बनाया गया था।
इस दौरान हरियाणा सरकार की ओर से बताया गया कि सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखी गई है। वहीं, दिल्ली के थाने की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित करने की मांग का विरोध करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने कहा कि दिल्ली के थाने की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित करने का निर्देश पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट नहीं दे सकता है। दिल्ली इस हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले को लेकर अगली सुनवाई पर बहस होगी।
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट चेतन मित्तल ने हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब पुलिस हाल ही में राजस्थान के एक लड़के को वहां से उठाकर लाई थी। इसके बाद फर्जी नाका दिखाते हुए 10 किलो अफीम की रिकवरी दिखाई गई थी। इसके बाद राजस्थान पुलिस की तफ्तीश के दौरान सीसीटीवी फुटेज चेक किए गए तो पंजाब पुलिस के साथ लड़का राजस्थान से लेकर टोल प्लाजा तक कई स्थानों पर दिखा। इसके बाद राजस्थान पुलिस ने होशियारपुर एसएचओ समेत अन्य के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कर दी। हाईकोर्ट में इस किस्से के बाद पंजाब पुलिस की किरकिरी हुई।
बग्गा की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि यह मामला केवल एक ट्वीट का है और इस मामले की जांच पर रोक लगानी चाहिए। बग्गा ने कहा कि जिस तरह पंजाब सरकार इस मामले में हरकत कर रही है उससे साफ पता चलता है कि पुलिस रंजिशन काम कर रही है। शनिवार रात करीब एक घंटे तक चली बहस के बाद हाईकोर्ट ने बग्गा के खिलाफ किसी भी किस्म की कार्रवाई पर 10 मई तक रोक लगाई थी उस आदेश को अब 6 जुलाई तक जारी रखने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने साथ ही बग्गा को जांच में शामिल होने का आदेश दिया है।