कोरोना के कारण लगभग दो साल से मामलों पर सुनवाई नहीं हो रही है। मेरे पास 300 ऐसे मामले हैं जिन पर दो साल से केवल तारीख पड़ रही है। आईपीसी की धारा 138 के मामलों में आरोपियों को पूरा लाभ मिल रहा है। कोरोना के कारण अदालत के निर्देश है कि आरोपियों को वारंट न भेजे जाएं। इस कारण पीड़ितों और वकीलों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। -मुनीष दीवान, वकील, जिला अदालत
एक साल से मामले की पहली सुनवाई का इंतजार
एक साल पहले से कोरोना के कारण मामले स्थगित हो रहे हैं। उसके बाद जजों के तबादले हो गए। मेरे कई केस ऐसे हैं, जिस पर एक साल से पहली सुनवाई तक नहीं हो पाई है। पहली सुनवाई पर बयान दर्ज होने के बाद दूसरी पार्टी को नोटिस जाता है, लेकिन एक साल से मामले लटक रहे हैं। इससे वकीलों से उनके क्लाइंट का संपर्क भी टूट रहा है। -पुनीत छाबड़ा, वकील जिला अदालत
पीड़ित और वकील दोनों परेशान
सिविल मामलों में ज्यादा समस्या हो रही है। जिनको अदालत की तरफ से गुजारा भत्ता मिलना था, वह लगभग एक साल से लटका पड़ा है। लोगों के रोजगार भी छूट गए। घरेलू हिंसा और मकान खाली करवाने के मामलों में ज्यादा समस्या है। पीड़ित एक साल से इंसाफ के इंतजार में है। इसके कारण पीड़ित और वकील दोनों आर्थिक समस्या झेल रहे हैं। -विपिन कुमार, वकील जिला अदालत
घरेलू हिंसा के चलते जो महिलाएं पति के घर से निकाली गई हैं, उन्हें डेढ़ साल से गुजारा भत्ता नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में वह अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ आर्थिक समस्याएं झेल रही है। उनके पास रोटी तक खाने के लिए पैसे नहीं है। मुवक्किलों को प्रवेश न होने के कारण दूसरी पार्टियों को नोटिस भी नहीं हुए हैं। इससे वकीलों को फीस नहीं आ पाती। -गीतांजलि वाधवा, वकील जिला अदालत
क्लर्क एसोसिएशन ने मृतक मुंशी के परिवार को दी 25 हजार की आर्थिक सहायता
जिला अदालत में मुंशियों ने अपनी एसोसिएशन बनाई हुई है। यह एसोसिएशन किसी भी मुंशी को कोई भी परेशानी होने पर आर्थिक सहायता करती है। इसमें सभी मुंशी और वकील अपनी इच्छा अनुसार पैसे इकट्ठा करते हैं, ताकि मुश्किल समय में सहायता की जा सके। क्लर्क एसोसिएशन ने कोरोना से मृतक मुंशी बलवंत के घर जाकर 25 हजार रुपये की राशि प्रदान की। एसोसिएशन के महासचिव सुखविंदर पाल सिंह ने बताया कि भविष्य में भी जरूरत पड़ने पर बलवंत के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस दुख की घड़ी में क्लर्क एसोसिएशन के सभी सदस्य परिवार के साथ हैं।