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संकट: कोरोना के कारण डेढ़ साल से चंडीगढ़ कोर्ट में काम ठप, 70 हजार मामलों की सुनवाई रुकी 

Wed, 16 Jun 2021 10:57 AM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

जुलाई 2020 तक जिला अदालत में लगभग 51 हजार मामले लंबित थे। न्यायिक अधिकारियों की ड्यूटी भी रोस्टर के अनुसार तय की गई है। हत्या जैसे आपराधिक मामलों समेत अन्य महत्वपूर्ण मामलों में आरोपियों की केवल जमानत याचिका पर भी सुनवाई हो रही है। 
 
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कोरोना के कारण अदालतों में रुकी सुनवाई। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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कोरोना के चलते करीब डेढ़ साल से चंडीगढ़ जिला अदालत का कामकाज ठप हो गया है। इस कारण जिला अदालत में लगभग 70663 मामलों की सुनवाई रुक गई है।  वहीं, कोरोना के कारण वकील और पीड़ित दोनों को समस्या झेलनी पड़ रही है। सुनवाई बंद होने के कारण मुवक्किल अदालत नहीं आ सकते जिससे वकीलों को उनकी फीस भी नहीं मिल पा रही।

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फिलहाल नए चर्चित अपराधिक मामलों पर ही सुनवाई हो रही है बाकी सभी मामलों को आगे की तारीख के लिए स्थगित कर दिया जा रहा है। जुलाई 2020 तक जिला अदालत में लगभग 51 हजार मामले लंबित थे। न्यायिक अधिकारियों की ड्यूटी भी रोस्टर के अनुसार तय की गई है। हत्या जैसे आपराधिक मामलों समेत अन्य महत्वपूर्ण मामलों में आरोपियों की केवल जमानत याचिका पर भी सुनवाई हो रही है। हालांकि मामलों का ट्रायल आगे नहीं बढ़ पा रहा है। सिविल मामलों में पीड़ित लगभग डेढ़ साल से इंसाफ मिलने का इंतजार कर रहे हैं। बता दें जिला अदालत में कोरोना से अभी तक दो लोगों की मौत हुई है।

300 मामलों पर दो सालों से नहीं हुई सुनवाई

कोरोना के कारण लगभग दो साल से मामलों पर सुनवाई नहीं हो रही है। मेरे पास 300 ऐसे मामले हैं जिन पर दो साल से केवल तारीख पड़ रही है। आईपीसी की धारा 138 के मामलों में आरोपियों को पूरा लाभ मिल रहा है। कोरोना के कारण अदालत के निर्देश है कि आरोपियों को वारंट न भेजे जाएं। इस कारण पीड़ितों और वकीलों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। -मुनीष दीवान, वकील, जिला अदालत

एक साल से मामले की पहली सुनवाई का इंतजार
एक साल पहले से कोरोना के कारण मामले स्थगित हो रहे हैं। उसके बाद जजों के तबादले हो गए। मेरे कई केस ऐसे हैं, जिस पर एक साल से पहली सुनवाई तक नहीं हो पाई है। पहली सुनवाई पर बयान दर्ज होने के बाद दूसरी पार्टी को नोटिस जाता है, लेकिन एक साल से मामले लटक रहे हैं। इससे वकीलों से उनके क्लाइंट का संपर्क भी टूट रहा है। -पुनीत छाबड़ा, वकील जिला अदालत

पीड़ित और वकील दोनों परेशान
सिविल मामलों में ज्यादा समस्या हो रही है। जिनको अदालत की तरफ से गुजारा भत्ता मिलना था, वह लगभग एक साल से लटका पड़ा है। लोगों के रोजगार भी छूट गए। घरेलू हिंसा और मकान खाली करवाने के मामलों में ज्यादा समस्या है। पीड़ित एक साल से इंसाफ के इंतजार में है। इसके कारण पीड़ित और वकील दोनों आर्थिक समस्या झेल रहे हैं। -विपिन कुमार, वकील जिला अदालत
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पीड़ित महिलाएं झेल रही समस्याएं

घरेलू हिंसा के चलते जो महिलाएं पति के घर से निकाली गई हैं, उन्हें डेढ़ साल से गुजारा भत्ता नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में वह अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ आर्थिक समस्याएं झेल रही है। उनके पास रोटी तक खाने के लिए पैसे नहीं है। मुवक्किलों को प्रवेश न होने के कारण दूसरी पार्टियों को नोटिस भी नहीं हुए हैं। इससे वकीलों को फीस नहीं आ पाती। -गीतांजलि वाधवा, वकील जिला अदालत

क्लर्क एसोसिएशन ने मृतक मुंशी के परिवार को दी 25 हजार की आर्थिक सहायता
जिला अदालत में मुंशियों ने अपनी एसोसिएशन बनाई हुई है। यह एसोसिएशन किसी भी मुंशी को कोई भी परेशानी होने पर आर्थिक सहायता करती है। इसमें सभी मुंशी और वकील अपनी इच्छा अनुसार पैसे इकट्ठा करते हैं, ताकि मुश्किल समय में सहायता की जा सके। क्लर्क एसोसिएशन ने कोरोना से मृतक मुंशी बलवंत के घर जाकर 25 हजार रुपये की राशि प्रदान की। एसोसिएशन के महासचिव सुखविंदर पाल सिंह ने बताया कि भविष्य में भी जरूरत पड़ने पर बलवंत के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस दुख की घड़ी में क्लर्क एसोसिएशन के सभी सदस्य परिवार के साथ हैं।
 
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