हरियाणा में पूर्व कांग्रेस शासनकाल में वर्ष 2007 में हुई हिंदी के 1700 पोस्ट ग्रेजुएट टीचरों (पीजीटी) की भर्ती के खिलाफ 66 याचिकाएं पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट केजस्टिस दीपक सिब्बल की एकल बेंच ने सोमवार को खारिज कर दीं। याचिका में केवल तीन जिलों से संबंधित उम्मीदवारों को तरजीह देने का आरोप लगाया गया था।
एडवोकेट सुरजीत सिंह सलार, एडवोकेट विकास चतरथ और एडवोकेट अशोक भारद्वाज के माध्यम से दायर विभिन्न याचिकाओं में कहा गया था कि मेधावी उम्मीदवारों को इंटरव्यू में कम अंक देकर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाया गया।
यह भी कहा गया कि भर्ती के दौरान प्रक्रिया भी बदली गई और यहां तक कि परिणाम के अंकों में छेड़छाड़ भी हुई। आरोप था कि चयनित उम्मीदवारों के पतों से साफ झलकता है कि यह उम्मीदवार रोहतक, झज्जर और हिसार जिलों से संबंधित हैं।
आरोप है कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने चहेतों को तरजीह दी। भर्ती में कई अनियमितताएं बरतने का आरोप लगाते हुए शेष हरियाणा के उम्मीदवारों को दरकिनार करने की बात भी कही गई थी। इन आरोपों को सरकार ने सिरे से नकारते हुए हाईकोर्ट से कहा था कि भर्ती में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।
उम्मीदवारों का चयन मेरिट के आधार पर हुआ है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था और सोमवार को सभी याचिकाओं का निपटारा करते हुए याचिकाएं खारिज कर दी हैं।