हरियाणा में ओम प्रकाश चौटाला शासनकाल में जीआरपी में 350 सिपाहियों की भर्ती में बड़े स्तर पर धांधली के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मई महीने तक सुनवाई स्थगित कर दी है।
वर्ष 2003 में हुई भर्ती में सीबीआई धांधली की बात कह चुकी है और हाईकोर्ट सिपाहियों को हटाने का निर्देश भी दे चुका है। एक साल पहले सिपाहियों को सरकार ने नोटिस जारी कर बर्खास्त करने से पहले पक्ष रखने को कहा था। पिछली सुनवाई पर सिपाहियों ने हाईकोर्ट में अपने जवाब में कहा था कि अभी उन्हें सीबीआई की जांच रिपोर्ट ही मुहैया नहीं कराई गई है, ऐसे में इस रिपोर्ट पर कैसे विचार किया जा सकता है।
सिपाहियों के एडवोकेट अक्षय भान ने बेंच को उपरोक्त तथ्य बताते हुए कहा था कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही उसके तथ्यों पर कोई प्रतिक्रिया दी जा सकती है। इस मामले में हाईकोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सीबीआई अदालत की कार्रवाई के बाद फैसला लिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने कहा था कि इस मामले में दिल्ली सीबीआई अदालत में ट्रायल चल रहा है। यदि हाईकोर्ट कोई फैसला लेती है तो इससे ट्रायल प्रभावित होगा। हालांकि एमिक्स क्यूरी गुरमिंदर सिंह गैरी ने दलील दी थी कि सीबीआई इस मामले में बड़े स्तर पर धांधली की बात कह चुकी है, ऐसे में भर्ती रद्द कर दी जानी चाहिए।
मामले के अनुसार भर्ती से वंचित रह गए एक उम्मीदवार सुरिंदर ने उसे दरकिनार करने का आरोप लगाया था। इस पर हाईकोर्ट ने बार-बार जवाब मांगा था, लेकिन जवाब नहीं आया था। हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना की याचिका दायर की गई थी और एकल बेंच ने इस मामले को जनहित याचिका केतौर पर चलाने की सिफारिश की थी।
इसमें हाईकोर्ट ने स्व संज्ञान लिया था। भर्ती में बड़े स्तर पर धांधली होने का आरोप लगा था। इस भर्ती के सिपाही अभी नौकरी में बने हुए हैं।