हरियाणा में जाटों को आरक्षण देने के लिए जारी किए गए नोटिफिकेशन को रद्द करने के लिए दायर याचिकाओं की सुनवाई हाईकोर्ट ने 13 अक्तूबर तक के लिए स्थगित कर दी है। इस मामले में सरकार ने पिछली सुनवाई पर जवाब दायर कर कहा था कि उचित सर्वे के उपरांत ही आरक्षण दिया गया है।
सरकार के इस जवाब पर याचिकाकर्ताओं ने सर्वे को गलत करार दिया। इसके साथ ही इसमें कई खामियां बताते हुए कहा कि सरकार ने यह गलत किया। अब प्रतिक्रिया रिकॉर्ड में लेते हुए हाईकोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी है।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा में बिश्नोई, जाट, जट सिख, रोड़ और त्यागी जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग में शामिल किए जाने के खिलाफ याचिकाएं दायर हुई थीं और कहा गया था कि इससे आरक्षण की संख्या अधिक हो गई है।
हरियाणा सरकार ने जाटों को आरक्षण देने के लिए जो पैमाना बनाया है, वो गलत है। जाटों की तुलना सरकार ने अगड़ों से की है, जबकि यह तुलना पिछड़ी जाति से की जानी चाहिए थी। वैसे भी 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना गलत है।
एससी/बीसी विभाग के संयुक्त सचिव केएस गिल ने शपथ पत्र दाखिल कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1992 में इंदिरा साहनी बनाम केंद्र सरकार मामले में जारी निर्देश के मुताबिक आरक्षण दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में भी इस आरक्षण के खिलाफ याचिकाएं विचाराधीन हैं। हालांकि वहां भी रोक नहीं लगाई गई है।