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GMCH-32 डायरेक्टर और स्वास्थ्य सचिव को झटका, सैलरी रिलीज पर रोक

Fri, 14 Oct 2016 11:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Central Administrative Tribunal - फोटो : Amar Ujala
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गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 में डिपार्टमेंट ऑफ रेडियो डायग्नोसिस में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नरेंदर कौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने ट्रिब्यूनल के आदेश की पालन न करने पर गृह एवं स्वास्थ्य सचिव और डायरेक्टर प्रिंसिपल जीएमसीएच-32 की सैलरी रिलीज पर रोक लगा दी है। साथ ही दोनों की प्रापर्टी अटैचमेंट के आदेश जारी किए हैं। 
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हालांकि अदालत ने प्रतिवादी बनाए गए दोनों पक्षों को 16 नवंबर तक याचिकाकर्ता को सभी लाभ देने का वक्त दिया है। इस तय समय में सभी लाभ न देने पर याचिकाकर्ता को अटैच करने वाली प्रापर्टी की सूची देने और इसके लिए प्रोसेसिंग फीस देने की बात कही है। इसके बाद वारंट ऑफ अटैचमेंट जारी किए जाएंगे। 

असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नरेंदर ने ट्रिब्यूनल में दायर याचिका में पंजाब में दी गई पूर्व सेवाओं को लेकर पेंशन बेनिफिट्स दिए जाने की अपील की थी। उनका कहना था कि केस में प्रतिवादी पक्ष ने हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद लंबे समय से उन्हें कोई लाभ नहीं दिया है। डॉ. नरेंदर ने गृह कम स्वास्थ्य सचिव और जीएमसीएच-32 के डायरेक्टर प्रिंसिपल को पार्टी बनाया था। जीएमसीएच-32 के डिपार्टमेंट ऑफ रेडियो डायग्नोसिस में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत डॉ. नरेंद्र कौर ने मामले में हाईकोर्ट के 14 दिसंबर 2015 के फैसले के पालन के लिए एक एग्जिक्यूशन एप्लीकेशन दायर की थी। 
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हालांकि डा. नरेंद्र ने ट्रिब्यूनल में अपना मूल केस वर्ष 2013 में दायर किया था। इसमें पंजाब में तैनाती के दौरान दी गई पूर्व सेवाओं को लेकर पेंशन बेनिफिट्स देने की मांग की थी। 18 मार्च 2014 को ट्रिब्यूनल ने यह मांग खारिज कर दी थी। उस फै सले के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर की, जिसे मंजूर कर लिया गया। 14 दिसंबर 2015 को हाईकोर्ट ने प्रतिवादी पक्ष को आदेश दिए थे कि डॉ. नरेंद्र के सभी बेनिफिट्स उन्हें दिए जाएं। 

इस पर डॉ. नरेंदर ने प्रतिवादी पक्ष को पत्र लिख संबंधित आदेश की पालना करते हुए सभी बेनिफिट्स जारी करने की मांग की, लेकिन प्रशासन स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में उनका जीपीएफ अकाउंट चालू नहीं हुआ और उन्हें वित्तीय परेशानी हुई। इसे लेकर कंटेप्ट ऑफ कोर्ट के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के आदेश पर कैट में संबंधित याचिका दायर की गई। 
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