माडर्न लुक के साथ-साथ अब कपड़े आपको त्वचा के रोगों से भी बचाएंगे। ऐसे कपड़े पहनने से त्वचा रोग के साथ-साथ सांस और अन्य संक्रमण से भी निजात मिलेगी। इन कपड़ों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इन्हें तैयार करने में प्रदूषण भी नहीं फैलेगा। रोहतक की स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स के टेक्सटाइल डिपार्टमेंट में इस कवायद को लेकर काम चल रहा है।
जड़ी बूटियों का कर रहे इस्तेमाल
बेडशीट और अन्य कपड़ों को रंगने के लिए डाई (रंग) का इस्तेमाल होता है। इस सिंथेटिक डाई को तैयार करने के लिए केमिकल का भी प्रयोग होता है। इसे तैयार करने और पकाने के लिए आग का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इस केमिकल से प्रदूषण फैलता है। साथ ही तैयार होने वाले कपड़ों से स्किन एलर्जी होने का भी खतरा रहता है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स के टेक्सटाइल डिपार्टमेंट में नेचुरल डाई से कपड़े तैयार होंगे। इसमें घरेलू उपयोग में आने वाली आयुर्वेदिक चीजों के अलावा जड़ी-बूटियों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।