चंडीगढ़ में नौकरी से निकाले गए एक ठेकाकर्मी ने जब आरटीआई के जरिए स्वास्थ्य विभाग से जानकारी मांगी तो जवाब देने की बजाय विभाग ने उसे मानसिक रूप से परेशान (मेंटली डिस्टर्ब) करार दे दिया। बतौर अपीलीय अधिकारी स्वास्थ्य निदेशक की ओर से ऐसा किए जाने से पूर्व ठेकाकर्मी तनावग्रस्त है। उसने मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग में की है और अब केंद्रीय सूचना आयोग में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में है।
तजिंदर ने बताया कि आरटीआई डालने पर स्वास्थ्य विभाग ने ठीक तरीके से उसका जवाब नहीं दिया। दोबारा अपील की तो सुनवाई करने की बजाय बतौर अपीलीय अधिकारी स्वास्थ्य निदेशक ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान ठहरा दिया। इससे वह बेहद दुखी हैं। तजिंदर का कहना है कि उनके पास इस बात के भी सबूत हैं कि उनकी जगह नियम की अनदेखी कर अन्य लोगों को नौकरी पर रखा जा रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने विजिलेंस में भी शिकायत कर मामले की जांच करने का अनुरोध किया है। इसके अलावा स्वास्थ्य निदेशक की ओर से मानसिक रूप से परेशान ठहराए जाने पर उन्होंने मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत दी है।
तजिंदर ने बताया कि एक अक्तूबर 2021 को उनकी सेवा समाप्त की गई। इसके बाद उन्होंने 21 अक्तूबर 2021 को विभाग से आरटीआई के माध्यम से निकाले गए कर्मचारियों की सूची मांगी, लेकिन विभाग ने सूचना के अधिकार की अनदेखी करते हुए 43वें दिन उसका जवाब दिया, जिसमें बताया गया कि विभाग के पास ऐसे कर्मचारियों की कोई सूची नहीं है। इस पर आपत्ति जताते हुए तजिंदर ने तीन दिसंबर 2021 को दोबारा अपील दायर कर दी। इसके बाद 22 दिसंबर को बतौर अपीलीय अधिकारी स्वास्थ्य निदेशक से उनकी मुलाकात हुई।
संबंधित व्यक्ति को आरटीआई का जवाब दे दिया गया था, लेकिन उसने दोबारा अपील कर दी, जिसकी सुनवाई के दौरान उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था। उसका कहना था कि मेरे पास नौकरी नहीं है, मुझे आप किसी भी तरह नौकरी दीजिए। उसकी स्थिति देखकर यह कहा जा सकता है कि वह बहुत परेशान था। मेरे डेढ़ घंटे तक समझाने के बावजूद वह कुछ भी सुनने को राजी नहीं हुआ, इसलिए उसे मेंटली डिस्टर्ब कहा गया। -डॉ. सुमन सिंह, स्वास्थ्य निदेशक