चंडीगढ़। शहर में शनिवार को कोरोना का एक मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। 24 घंटे के दौरान 46 लोगों की जांच की, जिनमें से सेक्टर-43 निवासी एक महिला की रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह ने लोगों से मास्क लगाने के साथ-साथ भीड़भाड़ वाली जगह से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोगों को डरने की बजाय जागरूक रहने की जरूरत है क्योंकि कोरोना से बचाव का सबसे आसान तरीका मास्क लगाना व हाथ धोते रहना है। उन्होंने गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोग व बुजुर्ग संक्रमण से बचाव के सभी मानकों का सावधानी से पालन करने को कहा है, क्योंकि रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण वे आसानी से संक्रमण के शिकार हो सकते हैं। एक तरफ कोविड के केस आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं, वहीं लोग मानकों की अनदेखी करते नजर आ रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में काफी संख्या में लोग बिना मास्क के पहुंच रहे हैं जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। जीएमएसएच- 16 की ओपीडी में शनिवार को काफी ज्यादा संख्या में मरीज और उनके परिजन बिना मास्क के नजर आए। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे में कोरोना तीव्र गति से फैल सकता है। सभी को मास्क पहनने के साथ-साथ भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए।
इसका रखें ध्यान
- सर्दियों के दौरान वायरस का संचरण आसान होता है क्योंकि यह छींक और खांसी से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से होता है।
- यदि आप इन्फ्लूएंजा से पीड़ित हैं तो इधर-उधर न घूमें
- यदि तीन दिन के बाद भी बुखार कम न हो तो चिकित्सक से परामर्श लें
- भीड़भाड़ वाले और सार्वजनिक स्थानों पर जहां कोई वेंटिलेशन न हो, मास्क लगाकर ही जाएं।
कोरोना को लेकर एडवाइजरी जारी कर चुका है प्रशासन, अस्पताल में 1274 ऑक्सीजन बेड आरक्षित
कोरोना के नए वैरिएंट जेएन-1 को लेकर प्रशासन वीरवार को एडवाइजरी जारी कर चुका है। केंद्र सरकार ने भी एहतियात बरतने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य सचिव अजय चगती का कहना है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है, लोग एहतियात बरतें। सभी अस्पतालों में पहले से ही बेड और ऑक्सीजन समेत तमाम आवश्यक इंतजाम मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि किसी तरह के जोखिम को कम करने के लिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने डॉक्टर्स, पैरा मेडिकल और अन्य स्वास्थ्य स्टाफ समेत मरीजों और उनके तीमारदारों को मास्क पहने के निर्देश दिए हैं। अन्य सावधानियों में छींकते और खांसते समय रूमाल का उपयोग करने की सलाह दी गई है। विभाग का कहना है कि लक्षण दिखने पर कोविड जांच करवाएं और टेस्ट पॉजिटिव आने पर खुद को आइसोलेट करें। विभाग के मुताबिक अपने स्तर पर दवाई लेने से परहेज करें और अपनी आंखों, नाक और मुंह को बिना कारण न छुएं। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर न थूकें। अजय चगती ने यह भी बताया कि कोविड के मरीजों के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों में 1274 ऑक्सीजन बेड आरक्षित हैं। वहीं, 239 वेंटीलेटर बेड की भी व्यवस्था है। जब कभी आवश्यकता पड़ी व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी।
कोविड के बीच डेंगू के डंक का खतरा भी बरकरार, इस महीने मिल चुके हैं 23 मरीज
शहर में कोरोना के खतरे के बीच डेंगू का डर भी बरकरार है। स्थिति यह है कि कड़ाके की ठंड के बीच भी डेंगू के मरीज लगातार सामने आ रहे हैं जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड शुरू होने पर डेंगू के मामले खत्म हो जाते हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ती जा रही है क्योंकि बुखार के बढ़ते मामलों के बीच डेंगू और कोरोना में अंतर कर पाना मुश्किल साबित हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर लोगों को संक्रमण से बचाव के मानकों का पालन करने के साथ ही मच्छरों से भी बचाव करने की सलाह दे रहे हैं।
गौरतलब है कि 2022 के नवंबर में डेंगू के 256 मामले सामने आए थे जबकि दिसंबर में यह संख्या 32 थी। तमाम उपाय के बावजूद 2023 में भी डेंगू के मामलों पर काबू नहीं मिल पाया है। इस वर्ष नवंबर में डेंगू के कुल 118 केस मिले। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 15 दिसंबर तक यह संख्या 23 थी। अब भी लगातार डेंगू के मरीज सामने आ रहे हैं।
कोविड के लक्षण
कोविड-19 में रोगियों को खांसी, गले में खराश, गंध और स्वाद की कमी, सांस की तकलीफ और फेफड़ों से संबंधित अन्य कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।
डेंगू का लक्षण
इसमें रोगी को सिरदर्द, मांसपेशियों, हड्डी या जोड़ों में दर्द के साथ मतली, आंखों के पीछे दर्द, ग्रंथियां मे सूजन के साथ त्वचा पर चकत्ते हो सकते हैं। गंभीर मामलों में रक्त में प्लेटलेट्स की मात्रा कम होनी शुरू हो जाती है।