चंडीगढ़। कोरोना संक्रमित मरीजों को एडवाइजरी का पालन करना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद लक्षण न दिखने पर भी नियमों का पालन करें। स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देश एसिंप्टोमेटिक, सिंटोमेटिक और कोरोना के गंभीर मरीजों लिए एक समान हैं। इसका पालन कर संक्रमित खुद को आइसोलेशन की समय सीमा के अंदर गंभीर होने से बचाता है, वहीं दूसरों को भी संक्रमित करने से बचता है।
पीजीआई में कोविड के नोडल व डीन एकेडमी प्रो. जीडी पुरी का कहना है कि एसिंप्टोमेटिक मरीजों को घर से बाहर जाने की गलती नहीं करनी चाहिए। कम से कम 2 हफ्ते तक वह खुद को घर में आइसोलेट कर लें। इस दौरान ध्यान रहे कि ज्यादा से ज्यादा समय खुली हवा वाले स्थान पर बिताएं। संभव हो तो जालीदार खिड़की वाले कमरे में रहें, जहां हवा इधर-से उधर पास हो सके। ऑक्सीजन की मात्रा भी नापते रहें। सामान्य तौर पर 97 से 98 प्वाइंट माप आनी चाहिए। अगर 95 से कम हो तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। इसके अलावा हर 6 घंटे पर शरीर का तापमान चेक करते रहेें। शरीर का सामान्य तापमान 98.8 है। तापमान 100 से ज्यादा होने पर 24 घंटे के दौरान पैरासिटामोल की गोलियां समान अंतराल पर लेते रहें।
जीएमएसएच-16 के कोविड-19 के नोडल डॉक्टर हनी साहनी ने बताया कि एकांतवास के दौरान समय पर दवा लेनी जरूरी है। खानपान में भी सावधानी बरतें। गरिष्ठ भोजन कतई न करें। शिकंजवी, नारियल पानी, सूप, ज्यादा मात्रा में पानी पीएं। संक्रमित व्यक्ति का चादर, तौलिया और अन्य ऐसी वस्तुएं अच्छी तरह धुल कर साफ किया जाना चाहिए। होम आइसोलेशन के दौरान मरीज थ्री लेयर मास्क का प्रयोग करें। मास्क, मुंह व चेहरे को छूने से बचें। मास्क भीगने या गंदा हो जाने पर तत्काल बदल दें। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाली वस्तुओं व जगहों को अच्छी तरह सैनिटाइज करें। संक्रमित व्यक्ति के शौचालय को अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर से साफ करें। संक्रमित व्यक्ति खांसते समय मुंह पर रुमाल रखें व अच्छी तरह हाथ धोते रहें।