व्यक्तिगत रूप से किसानों एवं कृषि-वैज्ञानिकों का आपसी संपर्क कम हो पाता है या संभव ही नहीं होता। ऐसे में सामुदायिक रेडियो स्टेशन कृषि से संबंधित उन्नत तकनीकों की जानकारी पहुंचाने की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनेंगे। किसान समसामयिक विषयों पर संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। ये रेडियो स्टेशन स्थानीय संस्कृति, कला एवं ज्ञान को भी बढ़ावा देंगे। इन स्टेशनों पर महिलाओं को स्वावलंबी और स्वरोजगारोन्मुखी बनाने संबंधित कार्यक्रम भी प्रसारित किए जाएंगे।
91.2 मेगाहर्ट्ज पर सुन सकेंगे कार्यक्रम
विश्वविद्यालय में सबसे पहले 29 नवंबर 2009 को सामुदायिक रेडियो स्टेशन की स्थापना की गई और एफएम 91.2 मेगाहर्ट्ज पर कार्यक्रम प्रस्तुत करने शुरू कर दिए। अब इन रेडियो स्टेशन से दिन में दो बार सुबह साढ़े 9 से 11:30 बजे और दोपहर बाद 2:30 से 4:30 बजे कृषि पशुपालन, सरकारी योजनाओं, मौसम संबंधी जानकारी व स्थानीय कलाकारों द्वारा हरियाणवी संस्कृति कार्यक्रम प्रसारित किए जाएंगे।
बेसिल के सहयोग से हुई स्थापना
सह निदेशक (फार्म परामर्श सेवा) डॉ. सुनील ढांडा और परियोजना के नोडल ऑफिसर, सह निदेशक (विस्तार) डॉ. कृष्ण यादव ने बताया कि इन सामुदायिक रेडियो स्टेशनों की स्थापना भारत सरकार के उपक्रम ब्रॉडकास्टिंग इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (बेसिल) के सहयोग से की गई है। कार्यक्रम में तीनों कृषि विज्ञान केंद्रों के वरिष्ठ संयोजक डॉ. बीपी राणा (जींद), डॉ राजवीर गर्ग (पानीपत) एवं डॉ. प्रद्युम्न भटनागर (कुरुक्षेत्र), जिला विस्तार विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसानों सहित अनेक व्यक्ति भी मौजूद रहे।
रेडियो स्टेशनों के स्थापित होने के बाद किसानों व वैज्ञानिकों के संबंध अधिक घनिष्ठ होंगे और किसानों को हर प्रकार की जानकारी मिलती रहेगी। - प्रो. समर सिंह, कुलपति, एचएयू, हिसार।