चंडीगढ़। फिट और स्लिम दिखने की चाह में आजकल युवा तेजी से ऐसे शॉर्टकट अपना रहे हैं। यह उनकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। वजन कम करने के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के इंजेक्शन और दवाओं का इस्तेमाल एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह लापरवाही अस्थायी साइड इफेक्ट्स के साथ-साथ शरीर के अंगों को स्थायी नुकसान भी पहुंचा सकती है।
सोसाइटी ऑफ फार्माकोविजिलेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संदीप अग्रवाल ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि वजन घटाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हार्मोन आधारित इंजेक्शन और स्लिम बनाने की दवाएं यदि बिना डॉक्टर की निगरानी के ली जाएं तो खतरनाक है। ये लीवर, किडनी, पैनक्रियास और हृदय जैसे महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती हैं। कई मामलों में उल्टी, डिहाइड्रेशन, तेज धड़कन, कमजोरी और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी गंभीर समस्याएं भी देखी गई हैं।
सोशल मीडिया के दावों में फंस रहे युवा
डॉ. संदीप के अनुसार आज सोशल मीडिया और फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स के कारण यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। जल्दी वजन कम करें या एक महीने में स्लिम बनें जैसे दावे युवाओं को आकर्षित करते हैं। इसके चलते लोग बिना मेडिकल जांच के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या जिम ट्रेनर की सलाह पर इंजेक्शन और दवाएं लेने लगते हैं, जो कई बार उनके शरीर के लिए सही नहीं होतीं। हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए एक ही तरीका सभी पर लागू नहीं हो सकता।
शारीरिक और मानसिक समस्याएं भी बढ़ती हैं
डॉ. संदीप का कहना है कि वजन घटाने का सबसे सुरक्षित तरीका संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित रखना है। यदि किसी को चिकित्सकीय कारणों से दवा या इंजेक्शन की जरूरत पड़े, तो वह केवल विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह और निगरानी में ही लेना चाहिए। गलत तरीके से वजन कम करने की कोशिश से हार्मोनल असंतुलन, मांसपेशियों की कमजोरी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। कई बार वजन कम होने के बाद भी शरीर अंदर से कमजोर हो जाता है और आगे चलकर अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे काम करते हैं वेट लॉस इंजेक्शन और दवाएं
अधिकांश आधुनिक वेट लॉस इंजेक्शन शरीर में जी एल पी-1 हार्मोन के प्रभाव को बढ़ाकर काम करते हैं।
ये दिमाग को संकेत देते हैं कि पेट भरा हुआ है जिससे भूख कम हो जाती है
पेट खाली होने की प्रक्रिया धीमी कर देते हैं, जिससे लंबे समय तक तृप्ति बनी रहती है
ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखते हैं, जिससे फैट स्टोरेज कम होता है
इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाकर मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करते हैं
यही दवाएं गलत डोज या बिना निगरानी के लेने पर उल्टी, कमजोरी, लो शुगर, डिहाइड्रेशन और ऑर्गन डैमेज का कारण बन सकती हैं।