अमर सिंह राठौर के साथ हुई धोखाधड़ी को सांग के माध्यम से रविवार शाम को टैगोर थियेटर में दिखाया गया।
इसके साथ ही सूचना जन संपर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा द्वारा आयोजित सात दिवसीय सांग उत्सव की शुरुआत हुई। पहले दिन सांग अमर सिंह राठौर पेश किया गया। सांग को लिखा है धनपत सिंह ने और इसे निर्देशित सोनू ने किया।
सांग की कहानी अमर सिंह राठौर के इर्द गिर्द घूमती है जो अपने घर से गौने की चिट्ठी पाकर घर जाने की तैयारी करता है। वह आगरा में शाहजहां का सिपाहसलार है।
छुट्टी की अर्जी लेकर जब अमर सिंह शहजहां के पास पहुंचता है तो वह उसे 15 दिन की बजाए सिर्फ सात दिनों की ही छुट्टी देते हैं। इस पर शाहजहां के साले सलामत खान अमर सिंह से कहते है कि अगर वह सात दिन से ज्यादा एक भी दिन देर की तो हर दिन का एक लाख रुपये जुर्माना भरना पड़ेगा।
अमर सिंह शर्त मानकर घर चला जाता है। वह अपनी तय छुट्टी से ज्यादा बिताता है तो सलामत खान बादशाह शाहजहां को अपनी बातों में फंसा कर अमर सिंह पर एक दिन के हिसाब से साल लाख रुपये जुर्माना लगाने की सिफारिश करता है। जब वह आगरा आता है तो उसे इस साजिश का पता चलता है। इससे क्रोधित होकर वह सलामत का कत्ल कर देता है और वापस अपने घर लौट जाता है।
शाहजहां दरबार में धोखे से अमर सिंह को सुलहनामे की बात कर बुलाते हैं। शाहजहां यह साजिश अमर सिंह के साले अर्जुन गौड़ के साथ मिलकर रचते हैं और जैसे ही अमर सिंह आगरा के लिए आता है तो अर्जुन उसे धोखे से मार डालता है। अंत में अमर सिंह के मृत शरीर को देखकर शाहजहां उसके शरीर को उसकी पत्नी को सौंप देते है। अंत में वह पति की लाश के साथ सती हो जाती है।