बीते दो साल से देश के कई राज्यों विशेषकर पंजाब और हरियाणा के युवाओं में विदेश पलायन की प्रवृत्ति बढ़ी है। विदेश जाने का जुनून रोजगार का कम स्टेटस सिंबल ज्यादा बन गया है। अधिकतर युवा वैध माध्यमों से शिक्षा या रोजगार के अवसर तलाशने के लिए विदेश जाते हैं।
फिर भी काफी लोग अवैध रास्तों (डंकी रूट) से कई देशों से गुजरकर अमेरिका, कनाडा और यूरोप तक पहुंचते हैं। तमाम जोखिम के बावजूद पिछले कुछ वर्षों से करनाल, जींंद, कैथल, कुरुक्षेत्र, रोहतक और सोनीपत से डंकी रूट से विदेश जाने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है।
खेती में घटता मुनाफा, सरकारी नौकरियों की कमी, सामाजिक दबाव और फर्जी एजेंटों की चाल ने मिलकर हरियाणा के युवाओं को डंकी रूट जैसी खतरनाक राह पर धकेल दिया है जहां दांव पर न सिर्फ जिंदगी बल्कि पुश्तैनी मलकियत व पूरा भविष्य लगा हुआ है।
हरियाणा सरकार चाहकर भी इस प्रथा पर रोक नहीं लगा पा रही है। कानून के विशेषज्ञ कहते हैं कि इस पर रोक लगाने के लिए डंकी रूट की पूरी चेन को तोड़ने की जरूरत है जिसमें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से लेकर एजेंट तक शामिल हैं। साथ ही इस मामले की जांच हरियाणा पुलिस के बजाय किसी केंद्रीय एजेंसी को दी जानी चाहिए। तभी इस समस्या को खत्म किया जा सकेगा।
हजारों लोगों की सूची तैयार
अमेरिका में ट्रंप सरकार आने के बाद से वहां रह रहे अवैध प्रवासियों को वापस भेजा जा रहा है। जनवरी से लेकर अक्तूबर तक अवैध तरीके से अमेरिका में रह रहे हरियाणा के 658 लोगों को निर्वासित किया जा चुका है। इसके अलावा वहां अवैध रूप से रह रहे हजारों लोगों की सूची तैयार कर ली गई है। इनमें कई ऐसे युवा हैं जिन्होंने अपने सपनों की कीमत जमीन-जायदाद बेचकर चुकाई।
इस साल फरवरी में नया कानून भी बनाया
कई घर पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं तो कुछ लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी। हरियाणा सरकार ने इस पूरे नेटवर्क पर लगाम कसने के लिए करीब तीन वर्ष पहले विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। इसके बाद इस साल फरवरी में नया कानून भी बनाया। मगर इस चलन पर रोक नहीं लग सकी।
प्रदेश में 1000 से ज्यादा अवैध एजेंट सक्रिय
हरियाणा में सिर्फ 11 जिलों में 24 लाइसेंस प्राप्त इमीग्रेशन एजेंट हैं। बाकी 11 जिलों में एक भी नहीं है। इसके बावजूद प्रदेश में 1000 से ज्यादा अवैध एजेंट सक्रिय हैं। हरियाणा में डंकी रूट का चलन सिर्फ आर्थिक मजबूरी नहीं बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा, सरकारी सुस्ती और अवैध एजेंटों की सक्रियता का नतीजा है।
इस वजह से लोग डंकी रूट की ओर जा रहे
रोजगार और आर्थिक दबाव : हरियाणा की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था अब उतनी लाभदायक नहीं रही है। खेती में बढ़ती लागत, घटता मुनाफा और बेरोजगारी ने युवाओं को वैकल्पिक रास्ते खोजने के लिए मजबूर किया है। सरकारी नौकरियों की सीमित संख्या और निजी क्षेत्र में अस्थिरता ने विदेश को बेहतर जीवन का प्रतीक बना दिया है। प्रदेश के गांवों में अब विदेश जाना भविष्य की गारंटी के रूप में देखा जाता है। यही सोच युवाओं को खतरनाक अवैध रास्तों की ओर ले जा रही है।
सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक दबाव
हरियाणा के गांवों में विदेश जाकर पैसा भेजने वालों की सफलता ने एक सामाजिक दबाव बना दिया है। भव्य घर, महंगी गाड़ियां और डॉलर की आमद ने विदेश जाने को सम्मान का प्रतीक बना दिया है। कई परिवार अपनी जमीन तक गिरवी रख देते हैं ताकि उनका बेटा विदेश गया हुआ कहलाए चाहे रास्ता कितना भी अवैध या खतरनाक क्यों न हो।
एजेंटों के झांसे और प्रवासी नेटवर्क
फर्जी ट्रैवल एजेंटों का जाल हरियाणा के हर जिले में फैला है। ये बेरोजगार युवाओं को आसान रास्ता और विदेशी नौकरी का झांसा देकर बेहतर भविष्य के सपने दिखाते हैं। कम से कम 40 से 60 लाख रुपये तक वसूलकर ये एजेंट युवाओं को डंकी रूट से भेज देते हैं। इसमें पनामा, कोलम्बिया, निकारागुआ, होंडुरास, ग्वाटेमाला और मैक्सिको के जंगलों से होते हुए अमेरिका तक पहुंचने का जानलेवा सफर शामिल होता है। अधिकांश युवा रास्ते में ही गिरफ्तार हो जाते हैं या शरणार्थी शिविरों में पहुंच जाते हैं। कई अपनी जान भी गंवा देते हैं।
डंकी रूट से इन देशों को जाते हैं ज्यादातर युवा
हरियाणा के युवाओं का मुख्य लक्ष्य अब अमेरिका है। हालांकि कनाडा, इटली, ऑस्ट्रेलिया और यूके के प्रति भी आकर्षण है लेकिन डंकी रूट से अमेरिका पहुंचने की कोशिश सबसे ज्यादा है। इसकी वजह अमेरिकी डॉलर का भारतीय रुपये से दिन प्रतिदिन मजबूत होना है। इस रूट में दक्षिण अमेरिका के कई देश (पनामा, निकारागुआ, होंडुरास, मेक्सिको) ट्रांजिट प्वाइंट बन चुके हैं
युवाओं का आर्थिक गणित : विदेश की कमाई बनाम घरेलू रोजगार
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर गुरुग्राम के एक पंजीकृत इमीग्रेशन एजेंट ने बताया कि युवाओं के विदेश जाने की सबसे बड़ी वजह कमाई का भारी अंतर है। हरियाणा में औसत आय 20–25 हजार महीना है। विदेश में यही काम 1.5 से 2.5 लाख तक यानी 6 से 10 गुना ज्यादा दिलाता है।
हरियाणा का युवा 45 लाख रुपये खर्च करके डंकी रूट से अमेरिका पहुंचना चाहता था, क्योंकि वहां वैध कामगार कम से कम 1.8 लाख रुपये महीना कमाता है और दो साल में अपनी पूंजी वसूल सकता है। यही रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट की सोच युवाओं को खतरनाक रास्तों पर ले जाती है। मगर असलियत इतनी आसान नहीं है। अवैध प्रवासी को न कानूनी सुरक्षा मिलती है और न स्थायी नौकरी।
इसके अलावा एजेंटों को मोटा हिस्सा देना पड़ता है और रहन-सहन का खर्च जोड़ें तो कमाई का आधा हिस्सा वहीं खत्म हो जाता है। विदेश में 2 लाख रुपये महीना सुनने में बड़ा लगता है लेकिन बचत मुश्किल से 60–80 हजार रुपये ही रह जाती है। कुल मिलाकर विदेश की कमाई 8–10 गुना ज्यादा दिखती है लेकिन जोखिम, खर्च और असुरक्षा जोड़ने पर वास्तविक फायदा सिर्फ 2-3 गुना ही रहता है।
सात साल में 3053 फर्जी ट्रैवल एजेंट गिरफ्तार
हरियाणा पुलिस ने 2019 से सितंबर 2025 के बीच कबूतरबाजी में 3455 मुकदमे दर्ज करके 3053 फर्जी ट्रैवल एजेंटों और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। इनसे पुलिस ने कुल 52 करोड़ 6 लाख 22 हजार 164 रुपये बरामद किए हैं। सबसे अधिक केस करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, कैथल, यमुनानगर और पानीपत में आए हैं। साथ ही पुलिस ने अवैध इमीग्रेशन संबंधी शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई के लिए हेल्पलाइन नंबर-8053003400 भी जारी किया है। अप्रैल 2023 में एसआईटी भी गठित की गई थी।
फर्जी ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ दर्ज केस
वर्ष- मुकदमे
2019 - 213
2020 - 582
2021 - 183
2022 - 300
2023 - 750
2024 - 578
2025 - 849 (सितंबर तक)
सात साल में सबसे अधिक मुकदमे वाले जिले
जिला मुकदमे करनाल 658
कुरुक्षेत्र - 574
अंबाला - 457
कैथल - 256
यमुनानगर - 217
पानीपत - 106
सरकारी लेटलतीफी और अधूरा कानून
हरियाणा सरकार ने फरवरी 2024 में ट्रैवल एजेंट पंजीकरण एवं विनियमन विधेयक पेश किया था। फरवरी 2025 में इसे संशोधित करके विधानसभा में पास भी कर दिया गया लेकिन आठ महीने बीतने के बाद भी नियमावली नहीं बनने से इसकी अधिसूचना जारी नहीं हुई। इस कारण नए कानून के तहत फर्जी एजेंटों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
ये हैं डंकी रूट
भारत, कजाकिस्तान, दुबई, सेनेगल, लीबिया, निकारागुआ, होंडुरास, ग्वाटेमाला होते हुए मैक्सिको से यूएसए में प्रवेश करते हैं।
दक्षिण पूर्व एशिया : थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों के सीमाओं का फायदा उठाते हैं।
- मध्य पूर्व : संयुक्त अरब अमीरात, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों के रास्ते भेजते हैं।
- यूरोप : पोलैंड, बेलारूस, तुर्की, ग्रीस और इटली जैसे देशों से होते हुए अमेरिका पहुंचते हैं।
- दक्षिण अमेरिकी और कैरिबियन देश : एल साल्वाडोर, कुराकाओ, निकारागुआ, सूरीनाम के जरिए मैक्सिको और फिर संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश करते हैं।
रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम
डॉ भारत, राजनैतिक विश्लेषक और प्रोफेसर, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के मुताबिक अवैध रूप से विदेश जाने से रोकने के लिए यह कदम उठाए जाने चाहिए -
1. सुरक्षित रोजगार : युवाओं को सुरक्षित रोजगार, उनकी योग्यता के आधार पर वेतन देने की आवश्यकता है।
2. जागरूकता अभियान : गांवों और कॉलेजों में डंकी रूट के खतरों और कानूनी परिणामों पर जनजागरूकता बढ़ाई जाए।
3. वैध एजेंटों का प्रमाणीकरण : हर जिले में पंजीकृत एजेंटों की संख्या बढ़ाई जाए और निगरानी तंत्र मजबूत किया जाए।
4. कौशल विकास व रोजगार योजनाएं : युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर दिए जाएं।
5. सख्त कानूनी कार्रवाई : एसआईटी को सशक्त बनाकर फर्जी एजेंटों की संपत्ति जब्त करने जैसे कदम उठाए जाएं, नए नियमों को तत्काल लागू किया जाए।
6. सामाजिक सोच में बदलाव : विदेश जाना ही सफलता वाली धारणा को तोड़ने के लिए पंचायतों और मीडिया को जोड़ना होगा।
हरियाणा में 2022 के बाद डंकी रूट का चलन बढ़ा
रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के कानून विभाग से सेवानिवृत्त प्रोफेसर कृष्णपाल सिंह महलवार के मुताबिक हरियाणा से विदेश जाने का चलन बीते 10-15 साल में तेजी से बढ़ा है। साल 2018 से 2022 के बीच 30 हजार से अधिक छात्र विदेश गए हैं। इनमें से अधिकांश कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप जैसे देशों में गए हैं। साल 2022 के बाद अमेरिका के लिए अवैध डंकी रूट का चलन बढ़ा है। 2023 से 2025 के बीच ऐसे कई मामले सामने आए जिनमें युवाओं की मौत और डिपोर्ट किए जाने की रिपोर्ट शामिल हैं। 2025 में फरवरी में कैथल के एक युवक की मौत डंकी रूट पर हुई थी। इससे यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आया था।
नियमावली तैयार, जल्द होगी लाग
राज्य में लगातार अवैध एजेंटों की गिरफ्तारी जारी है। नए कानून के तहत नियमावली भी लगभग तैयार है और जल्द लागू होगी। फर्जी एजेंटों को तीन से दस साल की सजा और दो से पांच लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान होगा। नए कानून में दोषी एजेंटों की संपत्ति भी जब्त की जाएगी। फर्जी एजेंटों पर होने वाली कार्रवाई की हर माह समीक्षा भी होती है। -सिबास कविराज, एसआईटी प्रमुख