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हरियाणा: कर्ज पर कांग्रेस ने सरकार से मांगा श्वेत पत्र, हरे हुए मिर्चपुर कांड के जख्म

Tue, 03 Mar 2020 01:12 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा पर लगातार बढ़ते जा रहे कर्ज पर सोमवार को सदन में जमकर बहस हुई। कांग्रेसी विधायकों ने बजट पर चर्चा करते हुए जहां इसी मुद्दे पर सरकार को निशाने पर लिया, वहीं कांग्रेसियों ने हरियाणा की गठबंधन सरकार से इस पर श्वेत पत्र भी मांगा। सीएम मनोहर लाल ने कांग्रेसी विधायकों के इस वार पर मोर्चा संभाला और दो टूक कहा- कर्जा कैसे और कब-कब बढ़ा सबकुछ बताया जाएगा। सीएम ने कहा कि ये कर्ज पूर्व सरकारों की ही देन है।

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कांग्रेस के विधायक रघुबीर कादियान बजट पर अपने विचार रख रहे थे। उन्होंने कहा कि लगातार कर्ज बढ़ रहा है। उनके अनुसार हरियाणा सरकार पर कर्ज का आलम यह है कि प्रदेश में पैदा होने वाला हर बच्चा करीब 80 हजार का कर्जदार होता है। छह साल में सरकार ने कर्ज लेने के रिकॉर्ड तोड़ दिए। 

कांग्रेसी विधायक भूपेंद्र सिंह हुड्डा, गीता भुक्कल, राव दान सिंह, आफताब अहमद, शमशेर सिंह गोगी, बीबी बत्रा, जगबीर मलिक समेत अन्य कांग्रेसी विधायक इसी मुद्दे पर सरकार को घेरते नजर आए। कांग्रेसी विधायकों ने कहा कि सरकार श्वेत पत्र जारी कर ये बताए कि छह साल में जो कर्ज हरियाणा सरकार ने लिया है, उसका कितना लाभ आमजन को मिला। आमजन की सुविधाओं पर कितना खर्च किया गया और कर्ज के ब्याज पर कितना खर्च किया गया।

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बिजली कंपनियों को घाटे में छोड़कर गए, हमने उबारा

मोर्चा संभालने केबाद सीएम मनोहर लाल ने सदन में बताया कि पूर्व सरकार कांग्रेस अपने दस साल के कार्यकाल में बिजली कंपनियों को घाटे में छोड़कर गई थी। जब अक्टूबर 2014 के बाद हम आए तो प्रदेश का कर्ज 70931 करोड़ था। इसके अलावा बिजली कंपनियां 27 हजार करोड़ घाटे में थी। इनका ब्याज मिलाकर करीब 35 हजार करोड़ बना। 

हरियाणा सरकार ने इन बिजली कंपनियों को घाटे से उबारने का संकल्प लेते हुए इनका घाटा खुद पर ले लिया। ताकि ये बिजली कंपनियां मजबूत बने और जनता को अच्छी बिजली देने में सक्षम हों। सीएम ने कहा कि बिजली कंपनियों का घाटा खुद पर लेने के बाद ही प्रदेश सरकार पर ये कर्ज वर्ष 2015-16 में 101709 करोड़ हो गया। जोकि अब वर्ष 2019-20 में 176832 करोड़ है। अगले वित्त वर्ष के लिए ये कर्ज 198700 करोड़ हो सकता है। सीएम ने कहा कि सरकार कर्ज प्रदेश के विकास के लिए ले रही है और खास बात यह कि ये कर्ज निर्धारित सीमा के दायरे में ही रहते हुए लिया जा रहा है।

रोहतक में पार्किंग घोटाले की होगी जांच
विधायक बीबी बत्रा ने सोमवार को फिर रोहतक में मल्टीपर्पज पार्किंग व शॉपिंग कांपलेक्स का मुद्दा उठाया। विगत दिनों ने सीएम ने इस पर घोटाले की आशंका से इंकार कर दिया था। मगर सोमवार को सदन में बीबी बत्रा हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि जिस कंपनी को ये ठेका और जमीन लीज पर देने का काम किया गया है। उसमें से एक कंपनी दिवालिया घोषित है। जबकि हाईकोर्ट भी इस मामले में टेक्निकल बिड रद कर चुका है। जिस पर कंपनी सुप्रीम कोर्ट गई थी और वहां भी उनकी अपील को खारिज कर दिया गया था। 
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मगर उसके बावजूद संबंधित कंपनी को ठेका दे दिया गया। विधायक भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि ये मामला सीएम मनोहर लाल की भी प्रतिष्ठा से जुड़ा है, क्योंकि अपने आप में ये बड़ा घोटाला है। लिहाजा सीएम मनोहर लाल को इस मामले में निष्पक्ष जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए। इस पर सीएम ने सदन में कहा कि वे इस मामले की जांच करवाएंगे।

आईएस ज्योति अरोड़ा की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
विधायक बीबी बत्रा ने पानीपत शुगर मिल की क्षमता बढ़ाने हेतु खरीदी गई मशीनरी में भी धांधली का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि इस तरह की मशीनरी महाराष्ट्र की चीनी मिलों में भी खरीदी गई थी। जिसकी कीमत कम है, जबकि यहां तो उस तरह की मशीनरी को महंगे दाम पर खरीदा गया है। बत्रा ने कहा कि इस मामले में आईएएस ज्योति अरोड़ा ने भी एक रिपोर्ट सौंपी है। उसे सार्वजनिक करते हुए सरकार उसे देखे तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। सीएम ने कहा इसे भी देखते हैं।

मिर्चपुर के दर्द पर विधायकों की बहस
सदन में सालों बाद मिर्चपुर घटना के जख्म उस वक्त फिर से हरे हो गए। जब कुछ विधायकों ने इस मुद्दे को छेड़ा और ये मुद्दा बहस का विषय बन गया। अनिल विज ने एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि हमारी सरकार के कार्यकाल में न तो कभी पूर्व सरकार के कार्यकाल में हुए मिर्चपुर जैसा कांड हुआ और न ही गोहाना कांड जैसी घटना हुई। 

इस पर कांग्रेसी विधायकों ने सवाल दागते हुए कहा कि ‘गृहमंत्री साहब ये भी बताइए कि पंचूकला और रोहतक को किस सरकार के कार्यकाल में जलाया गया था।’ इस पर गृहमंत्री विज ने चुप्पी साध ली। उसके बाद विधायक ईश्वर सिंह ने कहा कि मिर्चपुर ऐसी घटना थी। जिसमें दबंगों ने 19 कमजोर वर्ग के लोगों के घर जलाए गए थे। जिसमें एक दिव्यांग बेटी और उसे बचाते हुए उसके पिता भी जिंदा जलकर मर गए थे। ऐसी घटना प्रदेश सरकार के कार्यकाल में नहीं हुई।
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