11 माह पहले गठित हुई इस पार्टी के बाद दुष्यंत ने पहले विधानसभा चुनाव में दहाई का आंकड़ा छू लिया है। हरियाणा लोकहित पार्टी ने भी सिरसा सीट पर गोपाल कांडा को जितवा कर खाता खेाल दिया है।
हरियाणा की नब्बे सीटों पर चुनाव लड़ने के बाद बहुजन समाज पार्टी एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी। इसके अलावा कोई अन्य दल विधानसभा चुनाव में अपना खाता नहीं खोल पाया है। राजकुमार सैनी भी गोहाना से चुनाव हार गए हैं।
जनता ने कांग्रेस को स्वीकार किया है। भाजपा का 75 पार का दावा हवा हवाई था। जिसकी हवा निकल गई है। पांच साल हरियाणा में सरकार ने कोई काम नहीं किया। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा
जनता का बहुत-बहुत आभार जो उन्होंने हमें कम समय में इतना प्यार दिया है। हम अपनी पार्टी के सभी वरिष्ठ लोगों से सोच विचार के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचेंगे। दुष्यंत चौटाला, जजपा नेता
2014 विधानससभा चुनाव
| भाजपा |
47 |
| इनेलो |
19 |
| कांग्रेस |
15 |
| हजकां |
02 |
| बसपा |
01 |
| अकाली |
01 |
| निर्दलीय |
05 |
2019 विधानसभा चुनाव
| भाजपा |
40 |
| कांग्रेस |
30 |
| जेजेपी |
10 |
| अन्य |
08 |
| इनेलो |
01 |
| हलोपा |
01 |
| अकाली |
00 |
| बसपा |
00 |
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भारतीय जनता पार्टी को फिर से सर्वाधिक विधानसभा क्षेत्रों में जिताने तथा वर्ष 2014 के चुनावों से भी अधिक प्रतिशत वोट देने के लिए हरियाणा की जनता का धन्यवाद किया है। यहां जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पिछले पांच वर्षों में भाजपा की वर्तमान सरकार ने हरियाणा की जनता की पूरी कर्मठता से सेवा की।
इस कार्य में सभी वर्गों द्वारा भाजपा सरकार को पूरा समर्थन और सहयोग देने के लिए भी उन्होंने हरियाणा की जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही भाजपा एक बार फिर से हरियाणा में सरकार बनाएगी और प्रदेश में एक ईमानदार एवं जवाबदेह सरकार के माध्यम से जनसेवा के कार्य में और भी तेजी लाएगी। उन्होंने कहा कि सबका साथ व सबका विकास के मूलमंत्र पर चलते हुए एक सशक्त एवं समृद्ध हरियाणा बनाने के कार्य को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।
हरियाणा में चुनाव नतीजों के बाद वर्ष 1982 और 2009 में हुए चुनावों के बाद उत्पन्न हुई स्थिति जैसे हालत बन गए हैं। 1982 में कांग्रेस को 90 में से 36, देवीलाल की लोकदल और भाजपा को 31 और 6 सीटें मिली थीं, जबकि 16 निर्दलीय जीते थे। उस समय जनता पार्टी को वर्ष 1980 में छोड़कर कांग्रेस में आए भजन लाल ने कूटनीति का परिचय देते हुए कांग्रेस की सरकार बना ली थी, हालांकि इसके पांच वर्ष बाद 1987 में हुए चुनवाओ में कांग्रेस की शर्मनाक हार हुई और उसे मात्र 90 में से 5 सीटें मिली।
इसी प्रकार 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 40, चौटाला की लोकदल को 31, कुलदीप बिश्नोई की हजकां को 6 सीटें मिली थी, जबकि 7 निर्दलीय जीते थे। उस समय भूपिंद्र हुड्डा ने ने हजकां के 5 विधायकों को अपने पाले में कर और सातों निर्दलीयों को साथ लेकर सरकार बनाई थी। हुड्डा लगातार दूसरी बार सीएम बने थे। हालांकि इसके पांच वर्ष बाद अक्टूबर, 2014 में हुए चुनाव में केवल 15 सीटें मिली थी।
सबसे अधिक अंतर से जीत
| प्रत्याशी |
विधानसभा |
जीत का अंतर |
| पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा |
गढ़ी सांपला किलोई |
58312 मत |
| सीएम मनोहर लाल |
करनाल |
45188 मत |
| मूल चंद शर्मा |
बल्लभगढ़ |
41713 मत |
स
बसे कम अंतर से जीत
- गोपाल कांडा सिरसा 602 मत
- मोहम्मद इलियास पुन्हाना 816 मत
- सुभाषा सुधा थानेसर 842 मत