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हरियाणा रोडवेज में फर्जी टिकट घोटाले की जांच अब विजिलेंस करेगी, मिल गई है मुख्यमंत्री की मंजूरी

Wed, 03 Jul 2019 12:02 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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हरियाणा रोडवेज के फर्जी टिकट घोटाले की जांच अब विजिलेंस करेगी। परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने विजिलेंस जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री की सहमति के बाद ही यह निर्णय लिया गया है। सीएम मनोहर लाल की औपचारिक स्वीकृति के लिए परिवहन मंत्री ने फाइल भेज दी है। सीएम की हरी झंडी के साथ ही विजिलेंस मामले की जांच शुरू कर देगी। सबसे पहले करनाल डिपो में हुए 94 लाख रुपये के फर्जी टिकट घोटाले का रिकार्ड कब्जे में लिया जाएगा।
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शिकायत के आधार पर हुई विभागीय जांच में करनाल डिपो का घोटाला ही पहले सार्वजनिक हुआ, उसके बाद अन्य रोडवेज डिपो के फर्जी टिकट घोटाले की जांच शुरू हुई। परिवहन निदेशालय करनाल के बाद अब तक गुरुग्राम और पलवल रोडवेज डिपो में फर्जी टिकट छपवाकर राशि हड़पने की जांच करा चुका है। दोनों डिपो में जांच के लिए गई लेखा अधिकारियों की टीम ने अपनी रिपोर्ट परिवहन निदेशक को बीते 28 जून से पहले सौंप दी है।

दोनों डिपो में भी लाखों रुपये के घोटाले की बात सामने आई है। निदेशक जांच रिपोर्ट को अध्ययन के बाद जल्दी परिवहन मंत्री को भेज देंगे। परिवहन मंत्री ने करनाल डिपो के लाखों रुपये के घोटाले की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही विजिलेंस जांच का फैसला किया है। घोटाले को जिस तरह से अंजाम दिया गया है, उसमें विजिलेंस जांच जरूरी बताई जा रही है। चूंकि, करनाल डिपो के महाप्रबंधक व ट्रैफिक प्रबंधक ने मिलकर घोटाले को अंजाम दिया है।
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विजिलेंस जांच की जद में वे सभी डिपो आएंगे, जिनमें बीते वर्ष कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान 16 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच टिकट छपवाए गए हैं।
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विजिलेंस जांच से होगा दूध का दूध, पानी का पानी : पंवार

परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि विजिलेंस जांच से पूरे घोटाले का दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। करनाल डिपो के फर्जी टिकट घोटाले की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इसलिए पूरे मामले में गहराई से जाने के लिए विजिलेंस को केस सौंपने का फैसला लिया है। जिन डिपो में भी घोटाला हुआ है, विजिलेंस उन सबका रिकॉर्ड कब्जे में लेकर जांच करेगी।

नपेंगे घोटालेबाज जीएम और ट्रैफिक मैनेजर
विजिलेंस जांच होने पर घोटाले को अंजाम देने वाले डिपो महाप्रबंधकों और ट्रैफिक प्रबंधकों का बचना मुश्किल है। फर्जी टिकट घोटाले में अधिकांश वही महाप्रबंधक शामिल हैं, जो विभाग से पदोन्नत होकर बने हैं। जिन डिपो में एचसीएस अधिकारियों को महाप्रबंधक लगाया गया है, उनमें हड़ताल के दौरान बिना नंबर के टिकट छपवाए ही नहीं गए।

कुछ घोटालेबाज जीएम और ट्रैफिक प्रबंधक सरकार के चहेते भी हैं, जो विभाग स्तर पर ही जांच होने की स्थिति में बच निकलते। लेकिन, विजिलेंस जांच के बाद उन पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
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