हरियाणा सरकार के लिए परिवहन विभाग के उच्च अधिकारियों की लचर कार्यप्रणाली एक बार फिर सिरदर्द बनने जा रही है। रोडवेज कर्मियों ने अफसरों के अड़ियल रवैये के कारण ही सोमवार रात 12 बजे से बेमियादी हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है।
परिवहन नीति-2017 को रद्द करने का समझौता 13 अप्रैल को होने के बावजूद अधिकारियों ने उसे सिरे चढ़ाया ही नहीं। इसके बाद भी तीन बार अधिकारियों और रोडवेज बचाओ संघर्ष समिति की वार्ताएं हुई, लेकिन कोरे आश्वासन के अलावा परिवहन विभाग ने कुछ नहीं किया। प्रदेश के छह जिलों हिसार, जींद, झज्जर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर में 900 निजी बसें रूट पर दौड़ती रहीं।
बीते सप्ताह सरकार ने रोडवेज की आठों यूनियन के नेताओं को निजी बस ऑपरेटरों के खिलाफ बस संचालन पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था, इसके बावजूद जिला स्तर पर अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे टकराव और बढ़ गया। नतीजतन, प्रदेश सरकार को सोमवार रात 12 बजे के बाद रोडवेज बसों के न चलने से करोड़ों रुपये राजस्व की भी चपत लगेगी, चूंकि वर्तमान में चार हजार बसों के बेड़े में से लगभग 3750 बसें सेवाएं दे रही हैं। छह राज्यों में हरियाणा रोडवेज की बसों में रोजाना 13 लाख यात्री सफर करते हैं। सरकार के वैकल्पिक प्रबंध न करने से मंगलवार को परिवहन सेवाएं हरियाणा में चरमरा सकती हैं। खासकर लंबे रूट और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। हरियाणा रोडवेज बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य हरिनारायण शर्मा ने कहा कि सरकार की हठधर्मिता के कारण कर्मचारी एक बार फिर हड़ताल पर जाने को विवश हुए हैं।