हरियाणा सरकार की ओर से 3519 रूटों पर निजी परमिट जारी करने विरोध में रोडवेज कर्मियों ने शनिवार को भी पूरे प्रदेश में चक्का जाम रखा था। कैथल बस अड्डे पर रोडवेज तालमेल कमेटी के प्रदेश स्तरीय नेताओं की बैठक में चक्का जाम का फैसला लिया गया था।
बैठक में रोडवेज यूनियनों के छह प्रधानों ने भाग लिया था। उधर, विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा उठने पर सरकार हरकत में आ गई। देर रात कैथल के डीसी एनके सोलंकी ने रोडवेज नेताओं के साथ बैठक की, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकल सका।
परमिट रद्द होने के बाद ही चलेंगी बसें
रोडवेज नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार लिखित में इन 3519 परमिटों को रद्द करने के आदेश जारी नहीं करती, तब तक रोडवेज की बसें नहीं चलेंगी।
इससे पहले, कैथल के डीसी एनके सोलंकी ने शनिवार देर रात नौ बजे रोडवेज यूनियन नेताओं को बैठक के लिए बुलाया। बैठक में सरबत पूनिया, हरिनारायण शर्मा, दलबीर किरमारा, दलबीर मेहरा, आजाद सिंह, बलराज देशवाल ने भाग लिया।
कर्मचारियों ने नहीं माना प्रस्ताव
ट्रांसपोर्ट विभाग के अतिरिक्त सचिव आरएस जोल ने डीसी के माध्यम से हुई बातचीत में रोडवेज नेताओं को रविवार को रोहतक में मीटिंग के लिए बुलाया, लेकिन रोडवेज नेताओं ने हड़ताल समाप्त करने से मना कर दिया है।
रोडवेज नेता दलबीर किरमारा ने कहा है कि कर्मी हड़ताल खत्म नहीं करेंगे, लेकिन यदि सरकार हड़ताल के दौरान हमें बैठक के लिए बुलाती है, तो हम बातचीत के लिए तैयार हैं।
नेताओं ने चार घंटे तक किया मंथन
रोडवेज नेता जसबीर सिंह ने बताया कि कैथल बस अड्डा परिसर में शाम पांच बजे बैठक हुई। इसमें तालमेल कमेटी सदस्यों ने सभी पहलुओं पर विचार किया।
करीब चार घंटे तक चली बैठक में फैसला लिया गया कि जब तक हरियाणा सरकार निजी परमिटों के फैसले को रद्द करने का लिखित में आश्वासन नहीं देती, तब तक पूरे प्रदेश में चक्का जाम रहेगा।
तीन दिन पहले शुरू हुआ था विवाद
निजी परमिटों को रद्द करने का मामला प्रदेश में कई माह से चल रहा है। लेकिन, बुधवार को कैथल में निजी बस संचालकों और रोडवेज कर्मियों में विवाद के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।
दरअसल, सहकारी परिवहन समिति (प्राइवेट) खेड़ी लांबा की बस कैथल-टोहाना पर चलने के लिए काउंटर पर लगी थी। इस पर रोडवेज कर्मियों ने आपत्ति जताई और कहा कि प्राइवेट बस संचालकों पर प्रोविजनल टाइम टेबल पर चलने की अनुमति नहीं है। इसी मुद्दे पर प्राइवेट बस संचालकों और रोडवेज कर्मियों में विवाद हो गया।
मामला बढ़ने पर हाथापाई तक हो गई। इसके बाद रोडवेज कर्मियों ने बुधवार को छह घंटे तक चक्का जाम रखा था। रोडवेज नेताओं का कहना था कि अदालत में इस संबंध में 11 सितंबर को फैसला आएगा। इसके बाद ही संचालक बसें चला पाएंगे।
मामला हुआ था दर्ज
धक्कामुक्की और हाथापाई के संबंध में स्थानीय पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उधर, वीरवार और शुक्रवार को प्राइवेट संचालकों ने जिले के 68 रूटों पर हड़ताल कर दी थी।
शनिवार को प्राइवेट संचालकों ने बस अड्डे के बाहर से बसें चलाईं। इसके बाद रोडवेज कर्मियों ने निजी परमिटों को रद्द करने की मांग उठाते हुए पूरे प्रदेश में चक्का जाम करने का ऐलान कर दिया।
3800 रूटों पर नहीं चलीं बसें
कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि चक्का जाम से शनिवार को प्रदेश में स्थानीय और अंतरराज्जीय रूटों की लगभग 3800 बसें विभिन्न डिपों में खड़ी रहीं।
रोडवेज कर्मचारियों के राष्ट्रीय संयोजक बलवीर सिंह जाखड़ ने बताया कि राज्य सरकार ने रोडवेज कर्मचारियों से बातचीत किए बगैर 3519 रूटों को निजी हाथों में देने का एकतरफा फैसला किया है। सरकार जब तक यह निर्णय वापस नहीं लेती, तब तक रोडवेज कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने रोडवेज कर्मचारियों की मांग का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की है कि प्रदेश की जनता के हित में निजी क्षेत्र को रोड परमिट देने का अपना फैसला तत्काल वापस लें।