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हरियाणा-पंजाब के किसान गांवों में बंद करेंगे नेताओं की एंट्री, राष्ट्रीय किसान महासंघ का फैसला

Wed, 12 Dec 2018 04:27 AM IST
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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किसान - फोटो : फाइल फोटो
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पांच राज्यों में हुए चुनावों में भाजपा की हार के बाद किसानों का मूड सरकारों के खिलाफ और आक्रामक हो गया है। सरकार के साथ-साथ किसान अन्य राजनीतिक दलों को भी आगामी चुनावों में आड़े हाथों लेने की तैयारी में हैं। जिसके चलते आगामी लोकसभा चुनावों में किसान नेताओं का अपने गांवों में घुसने पर प्रतिबंध लगाने वाले हैं। यह फैसला राष्ट्रीय किसान महासंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया है। 

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राष्ट्रीय किसान महासंघ के प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ की मानें तो इस बैठक में हरियाणा, पंजाब समेत अन्य राज्यों के किसान नेता शामिल रहे। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जहां किसानों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई, वहीं निर्णय लिया गया कि आगामी चुनावों से पहले जो राजनीतिक दल शपथपत्र के साथ अपने लेटर हेड पर किसानों की मांगों को पूरा करने का पुख्ता वादा करेगा, वही गांव में घुस पाएगा। इसके लिए किसान नेता सभी गांवों में किसानों को लामबंद करेंगे। उल्लेखनीय है कि इस महासंघ के साथ विभिन्न प्रदेशों के 180 किसान संगठन जुड़े हुए हैं।

राष्ट्रीय किसान महासंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में लिया गया फैसला जहां सरकार पर दबाव बनाने को लेकर है, वहीं गांवों में नेताओं का प्रवेश वर्जित करने के लिए विभिन्न राज्यों के गांवों में 20 दिसंबर से अभियान छेड़ा जाएगा। जिसके अंतर्गत गांव-दर-गांव किसानों को इसके लिए तैयार किया जाएगा। 
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देना होगा इन वादों को लिखकर
- किसानों को स्वामीनाथन आयोग के अनुसार उनकी फसल की लागत के आधार पर डेढ़ गुना लाभकारी मूल्य सी-2+50 प्रतिशत के हिसाब से भुगतान किया जाए। देश की सभी फसलों को क्रय करने की गारंटी का कानून बनाया जाए।
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- देश के संपूर्ण किसानों को हर प्रकार के कर्ज से मुक्त किया जाए।
- फल, सब्जी एवं दूध का एमएसपी तय किया जाए।
- देश के सभी किसानों की न्यूनतम आय 18000 रुपये प्रति माह सुनिश्चित हो।
- शिक्षित ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित किया जाए।

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