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Manohar Lal: चौंका कर आए थे, जाते समय भी हैरान कर गए; ये हैं सीएम मनोहर लाल को बदलने के चार कारण

Wed, 13 Mar 2024 08:41 AM IST
शाहरुख खान आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

Haryana Politics News: लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने हरियाणा में चौंकाने वाला कदम उठाया है। मंगलवार को मनोहर लाल और उनके मंत्रियों ने इस्तीफे सौंप दिए। साथ ही भाजपा ने जजपा से नाता तोड़ लिया। नायब सिंह सैनी हरियाणा के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। आइए जानते हैं मनोहर लाल को बदलने के वो चार कारण क्या हैं।
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Haryana Political Crisis - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा में मंगलवार से मनोहर लाल का राज समाप्त हो गया। वह साढ़े नौ साल तक हरियाणा की सत्ता में रहे। 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद जब सीएम पद के लिए उनके नाम पर मुहर लगी तो सभी चौंक गए थे। पहली बार वह विधायक बने। 
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सरकार चलाने का कोई अनुभव नहीं था और सीधे सीएम की कुर्सी में जाकर बैठ गए। उस दौरान किसी को भी पहली बार उनके नाम पर यकीं नहीं हुआ था और आज जब मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दिया तब भी किसी को भरोसा नहीं हुआ। जाते समय भी वह लोगों को हैरानी में डाल गए। 

सीएम पद से हटने की उनकी चर्चाएं करीब डेढ़ साल पहले हुई थी, मगर समय-समय पर उनके कामों की पीएम व अमित शाह जिस तरह से तारीफ करते थे, उससे यही लगता था कि मनोहर लाल तीसरी बार भी सरकार का चेहरा रहने वाले हैं। हालांकि उनके सामने किसान आंदोलन, पहलवानों का धरना प्रदर्शन, जाट आंदोलन और राम रहीम की गिरफ्तारी जैसी कई चुनौतियां सामने आई, मगर उनकी कुर्सी पर खतरा कभी बना नहीं। 
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अपने कुशल प्रशासक व प्रबंधन की वजह से वह पीएम मोदी व शाह के चहेते बन गए। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कुशल अधिकाारियों की अच्छी फौज भी तैयार कर रखी थी, जिसकी वजह से उन्हें कभी काम में कोई दिक्कत नहीं आई।

इन योजनाओं की वजह से मनोहर लाल याद किए जाएंगे
मनोहर लाल अपने दोनों कार्यकाल के दौरान कई ऐसी योजनाएं लेकर आए, जिनकी वजह से वह पूरे देश में चर्चा में रहे। कड़े फैसलों की वजह से भी वह चर्चा में रहे हैं। कुछ ऐसी स्कीमें थी, जिसे केंद्र ने भी अपनाया। पूर्व सीएम मनोहर लाल ने सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए आठवीं व दसवीं पास करने की शर्त लगा दी थी। 

इस फैसले को उनकी काफी आलोचना हुई थी, मगर एक सभा में अमित शाह भी ने यह कहा था कि यदि वह मनोहर की जगह होते तो शायद इतना कड़ा फैसला नहीं ले पाते। उसके बाद वह स्वामित्व योजना लेकर आए। इसके तहत गांव के लोगों को मालिकाना हक मिला।

उनकी यह योजना इतनी प्रसिद्ध हुई कि केंद्र सरकार ने हरियाणा सरकार की इस योजना को अपना लिया। हरियाणा में हर परिवार की आईडी बनाने को लेकर वह परिवार पहचान पत्र की योजना लेकर आए। पहले तो इसका काफी विरोध हुआ, मगर बाद में लोग इसे अपनाने लगे। 

उनकी इस योजना को लेकर कई प्रदेश ने भी दिलचस्पी जताई थी। इसके अलावा पेड़ों को पेंशन देने की योजना हो या राज्य के कुंवारों को। उनके इस फैसले को पूरे देश में सराहा गया। वहीं, लोगों को घर बैठे काम कराने के लिए वह कई पोर्टल लेकर आए। विपक्ष ने इसका विरोध किया, लेकिन वह अपने फैसले पर अड़े रहे।

केंद्र में जा सकते हैं मनोहर लाल

मनोहर लाल केंद्रीय नेतृत्व के खासमखास है। मोदी ही उन्हें सीएम के तौर पर लाए थे। ऐसे में मनोहर लाल को केंद्र में नई भूमिका मिल सकती है। उनको लेकर दो चर्चाएं चल रही है। एक तो वह करनाल से सांसद का चुनाव लड़ सकते हैं। चुनाव जीतकर वह केंद्र में मंत्री के दावेदार होंगे। वहीं, एक यह भी चर्चा है कि उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। संघ के साथ जुड़े होने की वजह से उनका नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर चल रहा है। हालांकि एक सवाल के जवाब में उन्होंने इसके लिए इंकार कर दिया था।

 

54 वर्षीय नायब सिंह सैनी को पिछले साल अक्तूबर में हरियाणा भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। आठ महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार के चेहरे में किए गए परिवर्तन से हर कोई अचंभित है। हालांकि नायब सिंह सैनी हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के करीबी नेताओं में शामिल हैं। दोनों ने एक साथ संगठन में काम किया है। मनोहर लाल के कहने पर ही केंद्रीय नेतृत्व ने ओपी धनखड़ की जगह सैनी को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था।

एक दिन पहले पीएम ने मनोहर की थी तारीफ

मनोहर लाल के इस्तीफे के एक दिन पहले पीएम मोदी ने मनोहर लाल की खूब तारीफ की थी। 11 मार्च को गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे का उद्घाटन के दौरान पीएम ने पुरानी यादें साझा करते हुए कहा था कि उनकी मनोहरलाल के साथ पुरानी दोस्ती है। मनोहर लाल के पास एक मोटरसाइकिल होती थी, जिसे मनोहर चलाते थे और वह उनके पीछे बैठते थे।

सीएम बदलने के चार कारण

1. साढ़े नौ साल की सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर थी, इसे काटने के लिए नेतृत्व को बदला गया।
2. राज्य में अफसरशाही हावी थी। मंत्री नाराज थे, मगर मनोहर लाल लगाम कसने में नाकाम रहे।
3. राज्य में पिछड़े वर्ग को साधने के लिए मनोहर लाल की जगह सैनी को लाया गया।
4. एमपी, राजस्थान की तरह पार्टी राज्य को नया नेतृत्व देना चाहती थी, इसलिए मनोहर को बदला गया।

नायब सिंह सैनी बने हरियाणा के नए मुख्यमंत्री
आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने हरियाणा में चौंकाने वाला फैसला लिया है। जननायक जनता पार्टी (जजपा) से गठबंधन तोड़ते हुए मनोहर लाल की जगह प्रदेश अध्यक्ष नायब सिंह सैनी को नया मुख्यमंत्री बनाया है। कुरुक्षेत्र से सांसद और ओबीसी समुदाय के चेहरे सैनी को मंगलवार शाम को हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई।

 

नायब सिंह सैनी के साथ पांच मंत्रियों कंवरपाल गुर्जर, मूलचंद शर्मा, रणजीत सिंह चौटाला, जेपी दलाल और डॉ. बनवारी लाल ने भी शपथ ली। हालांकि पांचो मनोहर सरकार में भी मंत्री थे। फिलहाल कोई नया चेहरा शामिल नहीं किया गया है।

 

केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री मनोहर लाल और 13 मंत्रियों ने इस्तीफे सौंपे। इस्तीफे के बाद दिल्ली से आए पर्यवेक्षक केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, तरुण चुघ और प्रभारी बिप्लब कुमार देब की मौजूदगी में भाजपा विधायक दल की बैठक में नायब सिंह सैनी को विधायक दल का नेता चुना गया। सैनी के नाम का प्रस्ताव मनोहर लाल ने ही रखा। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद नायब सिंह सैनी ने राजभवन पहुंचकर सरकार बनाने का दावा पेश किया।

 
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इसी के साथ पिछले कई दिनों से जजपा के साथ गठबंधन आगे रखने की खबरों पर भी विराम लग गया। पार्टी ने जजपा के साथ चार साल से चले आ रहे गठबंधन से भी नाता तोड़ लिया। कांग्रेस ने इसे नाटक बताया है और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने और दोबारा चुनाव करवाने की मांग की है।
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