वित्तमंत्री अरुण जेटली के पिटारे से हरियाणा के लोगों को जहां टैक्स की दरों से राहत की उम्मीद है, वहीं उद्योगपति भी बहुत कुछ चाहते हैं। उद्योग जगत की मांग है कि एमएसएमई को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि कारोबार में वृद्धि के अलावा रोजगार के अवसर के साथ-साथ निवेश को भी बढ़ावा मिल सके।
इन मांगों में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स(जीएसटी) लागू करने, औद्योगिक इकाइयों के लिए एक्साइज टैक्स के लिए स्लैब को 1.5 से बढ़ाकर तीन करोड़ रुपये करने के अलावा एमएसएमई के लिए कॉरपोरेट टैक्स को भी 30 से घटाकर 20 फीसदी किए जाने की मांग शामिल हैं।
प्रदेश में औद्योगिक विकास की रफ्तार के लिए सरकार की कोशिश भी निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित करने की है। इसके लिए एमएसएमई को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से सोमवार को पेश किए जाने वाले आम बजट में टैक्स में कमी की आस लेकर उद्यमी नजरें टिकाए हुए हैं।
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के फरीदाबाद चैप्टर के प्रमुख रवि वासुदेव के मुताबिक आम बजट में उद्योगों और उद्यमियों चैंबर ऑफ इंडियन ओवरसीज एंटरप्रेन्यॉर्स के चेयरमैन रवि वासुदेव ने कहा कि सरकार को एमएसएमई को बढ़ाव देना चाहिए। इसके तहत टैक्स दरों में कमी की जानी चाहिए, ताकि उनकी मुश्किलें कम हो सकें।
वैट, इनकम टैक्स की दरों में कमी के अलावा कॉरपोरेट गवर्नेंस संबंधी नियमों को भी आसान बनाया जाना चाहिए। वासुदेव के मुताबिक माइक्रो स्मॉल मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) इक्विटी फंड की सुविधा होनी चाहिए। इससे इकाइयों को विस्तार के लिए लोन की बजाय इक्विटी रूट का फायदा मिल सकेगा।
इक्विटी फंड के जरिये एमएसएमई को आगे बढ़ने में काफी मदद मिलेगी। इसके लिए अवधि भी नियत होनी चाहिए। जाट आरक्षण की मांग को लेकर पिछले दिनों हरियाणा में बड़े पैमाने पर हुई उपद्रव की घटनाओं में प्रदेश भर की औद्योगिक इकाइयों को 2000 करोड़ से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है।
इसके बाद उद्योग एवं व्यापार जगत को भी रिलीफ पैकेज का इंतजार हैं। ऐसे में केंद्रीय आम बजट के जरिये सरकार की ओर से उद्योगों के लिए टैक्स दरों में कमी की घोषणा की उम्मीद है।