यह मानदेय सेवानिवृत्त कर्मचारी की मृत्यु तक प्रदान किया जाएगा। सेवानिवृत्त कर्मचारी की मृत्यु उपरांत उसके आश्रित या कानूनी उत्तराधिकारी को किसी भी परिस्थिति में किसी भी स्तर पर इस लाभ के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। मानदेय राशि का भुगतान केवल उन्हीं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को किया जाएगा जो किसी अन्य स्रोत या सेवानिवृत्त पेंशन का लाभ प्राप्त नहीं कर रहे हैं।
यह नीति पहली जनवरी 2019 से प्रभावी होगी। मानदेय प्राप्त करने के लिए पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारी को अपने आवेदन शपथ पत्र सहित नियम एवं शर्तों का उल्लेख करते हुए संबंधित गैर-सरकारी स्कूलों के प्रबंधन मंडल को भेजने होंगे। वे उसे अपनी सिफारिशों के साथ संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी या जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को भेजेंगे। उन्हें यह लिखित में देना होगा कि वे भविष्य में इस मानदेय राशि को बढ़ाने के लिए नहीं कहेंगे।
साधोपुर में 7.72 एकड़ भूमि महिला एवं बाल विकास विभाग को दी
मंत्रिमंडल ने नगर निगम अंबाला के गांव साधोपुर में स्थित लगभग 7.72 एकड़ भूमि वर्तमान कलेक्टर दर पर महिला एवं बाल विकास विभाग को देने का निर्णय लिया है। इस पर समेकित बहुउद्देशीय परिसर का निर्माण किया जाएगा। शहरी स्थानीय निकाय विभाग की तरफ से प्रस्ताव लाया गया था। परिसर में ऑब्जर्वेशन होम, स्पेशल होम, प्लेस ऑफ सेफ्टी और चिल्ड्रन होम स्थापित किए जाएंगे।
हरियाणा में पंचायती जमीनों पर नाजायज कब्जे के लिए जुर्माना अभी प्रति हेक्टेयर पांच से दस हजार रुपये था, अब उसे एक प्रतिशत प्रति वर्ष कलेक्टर रेट के हिसाब से निर्धारित कर दिया गया है। अधिकतर दस प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जाएगा। मंत्रिमंडल बैठक में इसे मंजूरी दी गई।
सरकार ने भूमि के मूल्य व बढ़ते कब्जों को देखते हुए यह निर्णय लिया है।
सरकार इसके जरिए अवैध कब्जों को रोकने का काम करेगी। जुर्माना राशि अधिक होने पर कब्जाधारियों के हौसले पस्त होंगे। मंत्रिमंडल ने पंजाब ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 में संशोधन को भी स्वीकृति प्रदान की है। मनीमाजरा खंड हरियाणा का भाग नहीं है, इसलिए अधिनियम की धारा-2 के परिभाषा खंड से ‘खंड मनीमाजरा’ शब्द को हटाया जाएगा।
अधिनियम की धारा-2 (जी) (4) में संदर्भित ‘पंजाब ग्राम पंचायत अधिनियम, 1952 की धारा-3 के खंड (एमएमएम)’ शब्दों के स्थान पर ‘हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-2 के खंड (द्ब1)’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे। कथित नदी प्रभावी क्षेत्र से संबंधित अधिनियम की धारा-2 (जी) के अपवाद खंड (द्ब) को हटाने का भी निर्णय लिया गया है ताकि गलत व्याख्या से बचा जा सके। पंजाब सरकार इसे पहले ही 1976 के अधिनियम संख्या 19 के तहत खत्म कर चुकी है।
मंत्रिमंडल बैठक में हरियाणा सिविल सेवा नियमों में संशोधन को घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की गई। नियमों में हरियाणा सिविल सेवा (सामान्य) नियम, हरियाणा सिविल सेवा (वेतन) नियम, हरियाणा सिविल सेवा (यात्रा भत्ता) नियम, हरियाणा सिविल सेवा (सरकारी कर्मचारियों को भत्ता) नियम, हरियाणा सिविल सेवा (अवकाश) नियम, हरियाणा सिविल सेवा (सामान्य भविष्य निधि) नियम और हरियाणा सिविल सेवा (पेंशन) नियम शामिल हैं।
इन सात नियमों में वेतनमान में संशोधन से संबंधित आवश्यक संशोधन के अलावा पहले से ही लिए गए नीतिगत निर्णयों को शामिल करने वाले कुछ और संशोधन किए गए हैं। इन नियम पुस्तिकाओं का मुद्रण हो चुका है और मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग में बिक्री के लिए उपलब्ध है। शेष दो पुस्तकें हरियाणा सिविल सेवा (सरकारी कर्मचारियों को भत्ता) नियम और हरियाणा सिविल सेवा (यात्रा भत्ता) नियम बाद में मुद्रित करवाई जाएंगी।
हरसक को क्रिड से जोड़ा, सूक्ष्म सिंचाई को कृषि विभाग से किया अलग
हरियाणा सरकार ने एक तरह के कार्य वाले विभागों के समायोजन का अहम निर्णय लिया है। मनोहर लाल मंत्रिमंडल ने इसे वीरवार को मंजूरी दे दी। हरसक (हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र) अभी तक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का हिस्सा था। जिसे अब क्रिड (नागरिक संसाधन सूचना विभाग) के साथ जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव वी उमाशंकर इस विभाग के प्रधान सचिव हैं। सरकार ने सूक्ष्म सिंचाई व भूजल को कृषि विभाग से निकालकर सिंचाई विभाग में जोड़ दिया है। सूक्ष्म सिंचाई व भूजल की सभी योजनाएं अब सिंचाई विभाग बनाएगा।
हरसक हिसार के प्रशासनिक नियंत्रण व परिसंपत्तियों को जैसे है, जहां है’ आधार पर नागरिक संसाधन सूचना विभाग को सौंपा जाएगा। हरसक की स्थापना 1986 में राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में उपग्रह डाटा के उपयोग एवं अनुप्रयोग, सभी रिमोट सेंसिंग, भौगोलिक सूचना प्रणाली के लिए नोडल एजेंसी और मानव रहित वाहन, ड्रोन आधारित सर्वेक्षण के लिए नोडल एजेंसी के रूप में की गई थी।
हरसक के अन्य प्रमुख उद्देश्यों में सुदूर संवेदीकरण के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना, मार्गदर्शन, समन्वय और सहायता करना और सुदूर संवेदी तकनीकों का उपयोग कर प्राकृतिक संसाधन क्षेत्रों की संपूर्ण निगरानी एवं आकलन के लिए सर्वेक्षण, सुदूर संवेदन के निर्दिष्ट क्षेत्रों में राज्य के शिक्षण और अनुसंधान संगठनों को अनुसंधान एवं विकास में सहायता करना, सुदूर संवेदी प्रौद्योगिकी एवं इसके अनुप्रयोगों में उन्नत अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए प्रशिक्षण सुविध, व्याख्यान, संगोष्ठियों का आयोजन और सुदूर संवेदी जांच के परिणामों का समय-समय पर प्रकाशन करना शामिल है।
हरसक की परिसंपत्ति में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार से एक रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से 21 अप्रैल 2087 तक 99 वर्ष की अवधि के लिए पट्टे पर ली गई 5 एकड़ भूमि शामिल है। पट्टा विस्तार योग्य है। इसके पास 146.32 लाख रुपये की अन्य अचल संपत्तियां और 7,24,27,776 रुपये की चल संपत्तियां भी हैं। इसके अलावा हरसक का 46,42,86,966.90 रुपये का बैंक डिपॉजिट और 51,62,84,938 रुपये की विभिन्न परियोजनाओं के लिए प्रतिबद्घ देनदारियां हैं।
हरसक चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार कैंपस में स्थित है और इसका गुरुग्राम में एक नोडल और पंचकूला में फ्रंट ऑफिस है। हरसक में 55 स्वीकृत तकनीकी एवं गैर-तकनीकी पद हैं। मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार हरियाणा में उपलब्ध ताजा पानी पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मुश्किल से पर्याप्त है।
सतही पानी का उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है। यह केवल लगभग 40 प्रतिशत जरूरत को ही पूरा कर पाता है। परिणामस्वरूप लगभग 60 प्रतिशत पानी की आवश्यकता को वर्षा या भूजल के माध्यम से पूरा किया जा रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड हरियाणा के लगभग 75 प्रतिशत क्षेत्र को डार्क जोन घोषित कर चुका है।
हरियाणा, विशेषकर दक्षिणी हरियाणा में भूजल की गहराई 800 से 1000 फीट तक नीचे है, इसलिए एकीकृत जल संसाधन के उद्देश्य से सतही पानी के साथ-साथ भूजल का प्रबंधन एक एजेंसी और एक विभाग के साथ होना चाहिए। यह व्यवस्था राज्य को एकीकृत तरीके से अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से जल संसाधनों का प्रबंधन करने में सक्षम बनाएगी। इसके मद्देनजर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधीन मौजूद ‘लघु सिंचाई योजना’ को परिसंपत्ति, वर्तमान काडर, स्टाफ और बजट के साथ सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा।