गुरुग्राम की एसआरएल लैब की ओर से कोरोना के संक्रमण के नमूनों की टेस्टिंग में लापरवाही पर हरियाणा सरकार ने कड़ा संज्ञान लेते हुए मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं। लंबे समय तक चली कानूनी जददोजहद के बाद सरकार ने यह आदेश दिए हैं। सूबे के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने इस बात की पुष्टि की है। अब इस मामले में गुरुग्राम पुलिस किसी भी समय कार्रवाई कर सकती है। चूंकि गृह विभाग भी स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के पास है। लिहाजा एफआईआर की कार्रवाई में कोई देरी होने की संभावना नहीं है।
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच करवाने पर यह पाया था कि 11 ऐसे लोगों की कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जबकि वे निगेटिव निकले थे। सरकार ने अपने स्तर पर अपनी प्रयोगशालाओं में यह जांच करवाई तो सभी लोग निगेटिव निकले। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने निजी लैब पर कार्रवाई के लिए एक कमेटी बनाई। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने इस मामले में महाधिवक्ता से भी राय ली। जिसके बाद एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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कार्रवाई में समय इसलिए लगा कि लैब के साथ सरकार का जो एमओयू साइन हुआ था। उसका अध्ययन किया गया। कई तकनीकी पहलुओं पर गौर करने के बाद स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों तक भी लैब की लापरवाही संबंधी फाइल भेजी गई। इस मामले में लैब प्रबंधन अपने आप को निष्पक्ष बताता रहा है। बहरहाल अब एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस अपने स्तर पर जांच करेगी।
कुल 11 मामले ऐसे आए थे। जिसमें जांच करने के बाद हमें यह पता चला कि रिपोर्ट गलत है। यह गंभीर मामला है। इसलिए लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। हमने सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अनिल विज, गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री, हरियाणा