हरियाणा सरकार एसवाईएल के अपने हिस्से का पानी लेने के लिए पुरजोर तरीके से जुट गई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक और दांव चला है। मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में हरियाणा के सदस्य सिंचाई की जल्द नियुक्ति की शनिवार को केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राज कुमार सिंह से हामी भरवा ली। नई दिल्ली में हुई बैठक में मुद्दे पर मनोहर लाल और सिंह के बीच विस्तृत चर्चा हुई। सदस्य सिंचाई का पद सितंबर 2020 में गुलाब सिंह नरवाल के निलंबन के बाद से खाली है।
हरियाणा सरकार सदस्य सिंचाई पद भरवाने के लिए तीन वरिष्ठ मुख्य अभियंताओं के नाम का पैनल केंद्र सरकार को भेज चुकी है। उसमें पेंच यह फंस गया था कि केंद्र सरकार में एक लॉबी इस कोशिश में जुटी थी कि बीबीएमबी में सदस्य सिंचाई और ऊर्जा का पद हरियाणा, पंजाब तक सीमित न रखकर अन्य राज्यों के लिए भी खोल देना चाहिए।
शनिवार को मुख्यमंत्री ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के सामने पुरजोर तरीके से यह बात रखी कि सदस्य सिंचाई का पद हरियाणा के हिस्से का है और उसे तीन सदस्यीय पैनल में से एक उपयुक्त नाम को तय कर जल्द भरा जाए। केंद्रीय मंत्री सिंह ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया है कि जल्द मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने केंद्रीय मंत्री से कहा कि हरियाणा के हितों का ध्यान रखने के लिए पद पर जल्द नियुक्ति जरूरी है। एसवाईएल सहित अन्य जल संबंधी मुद्दों की केंद्र स्तर पर तभी ठोस पैरवी हो पाएगी, जब हरियाणा का सदस्य बीबीएमबी में होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि बीबीएमबी से जुड़े जलाशयों में इस बार पानी का स्तर 40 फीसदी तक गिर गया था।
चूंकि, बीबीएमबी ने अधिक बिजली उत्पादन को तवज्जो दी। इसका खामियाजा हरियाणा को भुगतना पड़ा। मई-जून महीने में प्रदेश में पानी की किल्लत हुई और जगह-जगह लोगों ने नाराजगी जाहिर की। इसलिए सदस्य सिंचाई की नियुक्ति जल्द हो ताकि पानी की उचित आपूर्ति और एसवाईएल निर्माण का मुद्दा केंद्र स्तर पर प्रभावी तरीके से उठाया जा सके।
चेयरमैन के पास सदस्य सिंचाई का कार्यभार, सदस्य ऊर्जा को देने पर हरियाणा ने जताई थी आपत्ति
हरियाणा का सदस्य सिंचाई का पद खाली होने के बाद बीबीएमबी ने सदस्य सिंचाई का कार्यभार सदस्य ऊर्जा को सौंप दिया था। जिस पर मुख्यमंत्री ने डीओ लेटर के जरिये केंद्र सरकार से आपत्ति जताई थी। उसके बाद चेयरमैन को कार्यभार सौंपा गया है। सदस्य ऊर्जा का पद पंजाब के हिस्से है, ऐसे में अगर सदस्य सिंचाई का कार्यभार भी उनके पास रहता तो जल संबंधी मुद्दों पर हरियाणा की उचित पैरवी नहीं हो पाती। बीबीएमबी के 1976 में गठन के बाद से ही सदस्य सिंचाई का पद हरियाणा व सदस्य ऊर्जा का पद पंजाब के हिस्से में है।