हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक 10 दिसंबर को होगी। बैठक में सेवा का अधिकार (राइट टू सर्विस) अधिनियम को मंजूरी दी जाएगी।
इसके अलावा गोहाना में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जो घोषणाएं की थी, उन्हें भी मंजूरी दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने गोहाना में घोषणा की थी कि अफसरों को जवाबदेह बनाने के लिए कानून बनाएंगे।
इसी घोषणा को अमलीजामा पहनाने के लिए राइट टू सर्विस एक्ट बनाया जा रहा है। इसका खुलासा अमर उजाला ने 12 नवंबर के अंक में कर दिया था। इस एक्ट के तहत हरियाणा सर्विस कमीशन बनाया जाएगा।
इसमें एक मुख्य आयुक्त और चार आयुक्त होंगे। मुख्य आयुक्त मुख्य सचिव या मुख्य सचिव के पद के समान वाला अफसर बनेगा।
आयुक्तों में दो पद सचिव स्तर के रिटायर्ड अधिकारियों के लिए होंगे जबकि दो पद प्राइवेट होंगे जो अपने क्षेत्र में अनुभव रखते हों।
मुख्य पीके चौधरी और अतिरिक्त मुख्य सचिव कृष्ण मोहन 31 दिसंबर को रिटायर होंगे। कयास लग रहे हैं कि मुख्य सचिव पीके चौधरी को इस आयोग का मुख्य आयुक्त बनाया जा सकता है।
मुख्य आयुक्त और आयुक्तों का कार्यकाल पांच साल या 65 साल की उम्र तक होगा।
काम न किया तो लगेगा जुर्माना
सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत कुछ सेवाओं की अवधि तय की जाएगी। अगर तय समय में काम नहीं हुआ तो संबंधित अफसर पर जुर्माना लगेगा। पंजाब में पहले से ही सेवा आयोग काम कर रहा है। हरियाणा में वैसे 36 सेवाओं की अवधि आयोग गठित होने से पहले ही तय है।