कांग्रेस की बुरी हार का ठीकरा फिलहाल किसी के सिर नहीं फूटा है, मगर प्राथमिक तौर पर तीन बातें प्रमुख तौर पर कांग्रेस की हार का कारण बनी हैं। राव इंद्रजीत के जाने के बाद यादव बाहुल्य सीटों पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है, वहीं जाटों को आरक्षण देकर बड़ा राजनीतिक खेल खेलने का भी कांग्रेस को उलटा नुकसान हुआ है।
आंकड़ों के अनुसार जाट बाहुल्य क्षेत्रों में अधिकतर जाटों ने इनेलो को वोट दिया है। कांग्रेसी पूरे नौ साल प्रदेश की बेलगाम अफसरशाही पर लगाम कसने की मांग करते रहे, मगर सीएम लगाम नहीं कस पाए। इसलिए अफसरशाही के कारण भी कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने खुले तौर पर हार के कारणों में अफसरशाही को भी शामिल किया है। कांग्रेस को भितरघात का नुकसान हुआ है। भितरघात का नुकसान पिछले विधानसभा चुनाव में भी झेलना पड़ेगा।
राव इंद्रजीत का साथ छूटने से हुआ नुकसान
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर कांग्रेस को हाईजैक करने का आरोप लगाकर कांग्रेस के साथ 35 साल का रिश्ता तोड़ते हुए राव इंद्रजीत सिंह भाजपा में शामिल हुए और गुड़गांव से चुनाव लड़ा।
इस चुनाव में यादव बाहुल्य सभी क्षेत्रों में भाजपा महेंद्रगढ़, नांगल चौधरी, नारनौल, बावल, रेवाड़ी, अटेली, कोसली, पटौदी, बादशाहपुर से एकजुट होकर कांग्रेस के खिलाफ और भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में वोट दिया। इन सीटों पर यादवों के जितने वोट हैं उनसे भी ज्यादा वोट भाजपा को मिले हैं।
हुड्डा पर उलटा पड़ा जाट कार्ड
जाटों को आरक्षण दिलवाकर मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जाट कार्ड खेलने का प्रयास किया था, मगर उसका उलटा असर हो गया। इससे गैर जाट वोटर अधिकतर संख्या में कांग्रेस से खिलाफ हो गया। हिसार, जींद, सिरसा, कैथल जिलों के अधिकतर जाटों ने इनेलो के पक्ष में खुलकर वोट दिया। इससे कांग्रेस के दिग्गज चौधरी बीरेंद्र सिंह और संपत सिंह ने खुलकर स्वीकार किया है।
चुनाव परिणाम के अनुसार जाट बाहुल्य उचाना, नारनौंद और उकलाना विधानसभा क्षेत्रों ने इनेलो के दुष्यंत चौटाला को इतनी वोटें दी कि हजकां के कुलदीप बिश्नोई शेष छह विधानसभा सीटों पर चौटाला की लीड नहीं तोड़ पाए। सिरसा का गढ़ इनेलो ने दोबारा जीत लिया।
सोनीपत लोकसभा में भी जाटों की कुछ वोटें इनेलो को मिलीं और यहीं से जाटों की काफी वोटें कांग्रेस को जाने का अनुमान है। रोहतक और झज्जर से जाट समुदाय के अधिकतर वोट कांग्रेस के पक्ष में जाने का अनुमान है। वैसे इस बार जाटों और गैर जाटों की वोटें भाजपा को मिली हैं, जिससे भाजपा की जबर्दस्त जीत दर्ज हुई।
अफसरशाही पर लगाम की बात कही मगर कसी नहीं
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने गोहाना की 10 नवंबर की रैली में कहा था कि उनके पास लोग आते हैं और अफसरों के बारे में बात करते हैं। वे अफसरों पर लगाम कसने के लिए काम करेंगे। ऐसा कानून बनाएंगे कि अफसरों पर लगाम कसी जा सके।
सीएम ने जींद की रैली में कहा था कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए वे कानून बनाएंगे। यह कानून अब तक नहीं बन पाया। सीएम ने सभी उपायुक्तों से हर 15 दिन के दौरान एक रात गांवों में गुजारने का आदेश दिया था, मगर एक-दो डीसी को छोड़ किसी ने रात नहीं गुजारी।