हरियाणा के 250 से अधिक जेबीटी (जूनियर बेसिक टीचर्स) ने अंतर जिला तबादलों से तौबा कर ली है। सवा साल में बदली परिस्थितियों के मद्देनजर उन्होंने यह निर्णय लिया है। 23 अगस्त, 2019 को उनके तबादला आदेश जारी हुए थे लेकिन कानूनी पेचीदगियों के कारण अब लागू होने जा रहे हैं। इसलिए पारिवारिक व अन्य मजबूरियों के चलते 2544 में से दस फीसदी जेबीटी वर्तमान स्टेशन से कार्यमुक्त नहीं होना चाहते।
उन्होंने निदेशक मौलिक शिक्षा के नाम अपने आहरण व वितरण अधिकारी को तबादला रद्द करने का प्रार्थना पत्र दे दिया है, साथ ही शिक्षा निदेशालय को भी एक प्रति भेज दी है। जेबीटी ने शिक्षक संगठनों के समक्ष यह समस्या रखी थी, जिस पर हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के प्रधान सीएन भारती ने निदेशक मौलिक शिक्षा के समक्ष मामले को उठाया।
उन्होंने जेबीटी को तबादले रद्द करने का शपथ पत्र देने का सुझाव दिया था। उसके अमल में दिए जा रहे प्रार्थना पत्र में लिखा जा रहा है कि स्थानांतरण के बाद डेढ़ वर्ष बीतने के कारण मेरी पारिवारिक परिस्थितियां बदल गई हैं। स्थानांतरण से संबंधित दिए जाने वाला शपथ पत्र देने में वह असमर्थ है, इसलिए मेरा स्थानांतरण रद्द किया जाए।
जबरन किसी को नहीं किया जाएगा कार्यमुक्त : सुहाग
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य प्रधान तरुण सुहाग ने बताया कि किसी जेबीटी को जबरन कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। इस संबंध में सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निदेशालय अधिकारियों ने टेलीफोन पर निर्देश दे दिए हैं, उन्हें तबादला रद्द करवाने के इच्छुक जेबीटी की श्रेणी अनुसार सूची बनाकर भेजनी होगी।
प्रार्थना पत्र वाले जेबीटी के रद्द होंगे तबादले
स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने भी प्रार्थना पत्र देने वाले जेबीटी के तबादला आदेश रद्द करने के आदेश निदेशालय को दिए हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसे जेबीटी को कार्यमुक्त होने की जरूरत नहीं है।
जेबीटी इसलिए दूसरे जिले में जाने के इच्छुक नहीं
- बहुत से जेबीटी ने पिछले एक साल में वर्तमान स्टेशन पर ही परिवार बसा लिया है।
- वर्तमान जिले में घर बनाने के कारण अब उनको तबादला करवाने की जरूरत नहीं रही।