जाट आंदोलन के दौरान उपद्रवियों ने तबाही मचाते हुए न बच्चे को देखा और न ही बुजुर्ग को। कहा जाता है कि बच्चें दिल के बहुत भोले होते है। वो जब कुछ कहते है तो आवाज सीधे दिल से निकलती है।
ढाणी पाल में रहने वाला सात साल का लवकेश बहन तमन्ना के साथ हांसी लाल सड़क स्थित एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ता है। शनिवार को स्कूल बस उसे गांव से लेने गई थी लेकिन लवकेश स्कूल नहीं आया।
आता भी कैसे, उसके पास न तो कोई किताब है और न कॉपी। पैंसिल भी नहीं है। अब तो स्कूल ड्रेस भी नहीं है। उसका तमाम सामान जाट आरक्षण की आड़ में हुई हिंसा में जल चुका है।