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हरियाणा की सियासत: अपनी बोली, अपने मुद्दे... कहीं चौधर का नारा तो कहीं यादव बदल देते हैं चुनावों की तस्वीर

Tue, 12 Mar 2024 03:26 PM IST
निवेदिता वर्मा सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरियाणा की सात बेल्ट के लोगों की अपनी अलग बोली है और इनके मुद्दे भी अलग-अलग हैं। किसी बेल्ट में जाट मतदाता अधिक हैं तो वहीं अहीरवाल में यादवों का दबदबा है। शेष बेल्ट गैर जाट मतदाताओं के प्रभाव में है। कहीं चौधर का नारा है तो कहीं हरियाणा बनने के 58 साल बाद भी पानी का मुद्दा बरकरार है। इन सभी बेल्ट में अलग-अलग नेताओं का प्रभाव है।
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हरियाणा
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विस्तार
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बोली और मिट्टी के आधार पर कई क्षेत्रों व जिलों में बंटा हरियाणा राजनीतिक दृष्टि से सात बेल्ट में बसा हुआ है। प्रदेश में बांगर, बागड़, खादर-नदरक, देशवाली बेल्ट (जाटलैंड), अहीरवाल, मेवाती और दक्षिण हरियाणा की बेल्ट है। 
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अहीरवाल: महेंद्रगढ़-नारनौल और रेवाड़ी 
राजस्थान के साथ लगने के चलते यहां के लोगों की बोली पर इसकी झलक दिखती है। अहीरवाल में पानी बड़ा मुद्दा है। यहां लोगों को पीने के लिए पानी की किल्लत है और इसके अलावा यहां पर खेतों की नहरी पानी से सिंचाई नहीं हो पा रही है, जिससे जमीन बंजर है। हर चुनाव में सभी दल इस मुद्दे को भुनाते हैं। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत का अहीरवाल में बड़ा नाम है। पिछले चार बार से वह लगातार सांसद हैं। इनमें दो बार वे भाजपा व दो बार कांग्रेस की टिकट पर जीते। इनके अलावा, यहां पर कांग्रेस के कैप्टन अजय यादव, पूर्व मंत्री रामबिलास शर्मा, राव दान सिंह समेत अन्य नेताओं का भी प्रभाव है।

खादर-नरदक: उत्तरी हरियाणा के करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर व पंचकूला
नदियां होने के चलते यहां की धरती उपजाऊ है और इस क्षेत्र के लोगों की बोली मीठी है। इन जिलों में बाढ़ की समस्या बड़ी है। हर साल यमुना नदी, टांगरी और मारकंडा नदी में बाढ़ से लोग परेशान हैं। हर साल नदियों के साथ लगती फसलें खराब होती हैं और आसपास के गांव व कस्बे इससे प्रभावित होते हैं। यहां कभी भी चौधर और क्षेत्र में सत्ता का नारा नहीं रहा। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल करनाल से और गृह मंत्री अनिल विज विधायक हैं। इनके अलावा, यहां से कोई बड़ा चेहरा नहीं है। कांग्रेस में यहां पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा और पूर्व मंत्री निर्मल सिंह का नाम आता है।
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दक्षिण हरियाणा : गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल
यूपी के साथ लगने के चलते यहां पर बृज भाषा का असर है। गुरुग्राम और फरीदाबाद दिल्ली से सटे हैं, ऐसे में खूब विकास हो रहा है। नए उद्योगों या निवेश में कोई कमी नहीं लेकिन बढ़ता हुआ अपराध व पानी की कमी बड़ा मुद्दा है। बेरोजगारी यहां की बड़ी समस्या है। नेताओं की बात करें तो केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, अवतार और करतार भड़ाना परिवार का यहां पर दबदबा है। साथ ही कर्ण सिंह दलाल भी बड़ा चेहरा हैं।

बागड़: हिसार, भिवानी, चरखीदादरी सिरसा व फतेहाबाद।
राजस्थान और पंजाब से सटे होने के चलते यहां पर बागड़ी और पंजाबी दोनों ही भाषाएं बोली जाती हैं। इस क्षेत्र में नशा सबसे बड़ा मुद्दा है। यूं तो प्रदेश के 16 जिले नशे से प्रभावित हैं, लेकिन हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी सबसे अधिक प्रभावित हैं और यहां पर ओवरडोज से युवाओं की जान जा रही है। यहां पर चौधरी ओमप्रकाश चौटाला, चौधरी बंसीलाल और भजनलाल परिवार का दबदबा रहा है। मौजूदा स्थिति में भजनलाल परिवार से कुलदीप बिशनोई, बंसीलाल परिवार से किरण चौधरी और चौटाला परिवार से अजय और अभय राजनीतिक विरासत संभाले हुए हैं। राजनीतिक दृष्टि से यह बेल्ट प्रदेश की सबसे मजबूत रही है और ताऊ देवीलाल समेत इस धरती ने चार मुख्यमंत्री दिए हैं।

बांगर: जींद और कैथल
उचाना को तो बांगर की राजधानी तक कहा जाता है। साफगोई और बेबाकी के लिए यह धरती जानी जाती है। राजनीतिक रूप से यहां के लोग काफी मजबूत हैं और राजनीति की अच्छी समझ रखते हैं। अधिकतर सरकारों में बांगर की हिस्सेदारी रही, लेकिन हरियाणा के अलग प्रदेश बनने के 58 साल बाद विकास की कमी है। आज तक इस धरती का कोई बेटा प्रदेश का मुखिया नहीं बन सका। हां, ओमप्रकाश चौटाला नरवाना से विधायक होते हुए सीएम बने थे, लेकिन उनका मुख्य क्षेत्र सिरसा रहा है। इस क्षेत्र की दिक्कत ये है कि जमीन कम उपजाऊ है, खेतों को नहरी पानी की कमी है। औरों के मुकाबले दोनों शहरों में विकास कार्य कम हुए और रोजगार के लिए कोई बड़ा उद्योग यहां पर नहीं है। चौधरी बीरेंद्र सिंह और रणदीप सिंह सुरजेवाला इस क्षेत्र के दो बड़े चेहरे हैं, लेकिन दोनों में कोई भी प्रदेश का मुखिया नहीं बन सका है।

देशवाली बेल्ट: रोहतक, सोनीपत, झज्जर और पानीपत
इस बेल्ट को जाटलैंड भी कहा जाता है। यहां खड़ी बोली बोली जाती है। जमीन उपजाऊ है और राजनीतिक रूप से लोग काफी मजबूत हैं। यहां चौधर का नारा चलता है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद दीपेंद्र हुड्डा का दबदबा है और वह इसी चौधर के नारे के दम पर दो बार प्रदेश के सीएम भी रहे। हुड्डा के मुख्यमंत्री रहते इस क्षेत्र ने काफी तरक्की है और सड़कों के साथ साथ आईएमटी आने से यहां पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। इनके अलावा, पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यू, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर का रोहतक में प्रभाव है।

मेवात: नूंह व आसपास का मुस्लिम बहुल इलाका
यहां पर अधिकतर मुस्लिम नेताओं का ही प्रभाव है। यहां पर शिक्षा का स्तर भी कम है। दिल्ली के नजदीक होने और एनसीआर में होने के बावजूद यहां पर विकास नहीं हो पाया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़कों के साथ साथ बढ़ता अपराध यहां के मुद्दे हैं। इसके अलावा, बेरोजगारी और कोई नया उद्योग नहीं लगना भी मुद्दे हैं। यहां से तीनों विधायक कांग्रेस के हैं। नेताओं की बात करें कांग्रेस के आफताब अहमद और भाजपा नेता जाकिर हुसैन का यहां पर प्रभाव है।
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