नवजात बच्चों की मृत्यु दर को ध्यान में रखते हुए एक राज्य में एक खास प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसके कई फायदे देखने को मिल सकते हैं। दरअसल, हरियाणा में हर साल कम वजन और समय पूर्व जन्म के कारण बीस हजार से अधिक नवजात शिशुओं की मौत होती आ रही है। दो हजार ग्राम से कम वजन और प्री-मेच्योर बच्चों के जन्म लेते ही काल का ग्रास बनने के पीछे मुख्य कारण ठंड, संक्रमण और हाईपोग्लेसिया रहते थे, चूंकि इनमें प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती थी।
हरियाणा की खट्टर सरकार ने इन सभी कारणों का अध्ययन करने के बाद नवजात शिशुओं की जान बचाने का बीड़ा उठाया है। कंगारुओं की तर्ज पर इन्हें जीवनदान दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने कंगारू केयर यूनिट की शुरुआत प्रदेश में कर दी है। पहली यूनिट विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से सोनीपत जिला अस्पताल में हाल ही में शुरू की गई है। ऐसा करने वाला हरियाणा पूरे देश में पहला राज्य बन गया है। सरकार ने अगले छह महीने में सभी जिला अस्पतालों में ये यूनिट संचालित करने का लक्ष्य रखा है।
सरकार का उद्देश्य नवजात शिशुओं की मौत के आंकड़े को बेहद कम करना है। यूनिट में कम वजन और समय पूर्व जन्म वाले बच्चे को ठीक वैसे ही मां, दादा-दादी या पिता के सीने से 15-16 घंटे तक लगाकर रखा जाएगा, जैसे कंगारू मादा जन्म के बाद अपने मुट्ठी भर बच्चे को पिछली टांगों के पास बने थैलीनुमा बैग में डालकर आत्मनिर्भर होने तक रखती है। इस प्रयोग से नवजात शिशुओं के जीवित रहने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाएगी।
सोनीपत जिला अस्पताल में शुरू कंगारू केयर यूनिट के परिणाम बीते पंद्रह दिनों में उत्साहवर्धक हैं। इसमें समय पूर्व जन्म व कम वजन के कई बच्चों की जान बचाने में सफलता मिली है। बता दें कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार हरियाणा में जन्म लेने वाला हर चौथा बच्चा कम वजन का होता हे।