वैवाहिक विवादों से जुड़ी आपराधिक शिकायतें थाना स्तर पर ही निपट जाएं, इसके लिए प्रत्येक जिले में तीन परामर्शदाताओं को नियुक्त करने की हरियाणा सरकार ने स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी को मंजूरी दे दी है।
इन परामर्शदाताओं को पुलिस स्टेशनों के समक्ष लंबित वैवाहिक विवादों के संबंध में जोड़ों की काउंसलिंग करने का अधिकार होगा। प्री-लिटिगेशन चरण में वैवाहिक मामलों से उत्पन्न होने वाले सभी प्रकार के विवादों से निपटेंगे, जिसमें बच्चों की कस्टडी, घरेलू हिंसा, तलाक, गुजारा भत्ता और अन्य शामिल हैं। यह जानकारी हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में दी है।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सोमवार को बताया गया कि काउंसलर नियुक्त करने का कदम न केवल अदालतों में लंबित मामलों को कम करने में मदद करेगा, बल्कि उन पक्षों की सहायता भी करेगा, जिन्हें अपने विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए अदालती आदेश प्राप्त करने के लिए वर्षों तक चक्कर लगाना पड़ता है। सरकार की ओर से अनुबंध के आधार पर ऐसी नियुक्तियां करने के लिए हरियाणा राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को आवश्यक मंजूरी दे दी है।
हाईकोर्ट में 20 फरवरी को जारी आदेश की प्रति हरियाणा सरकार की ओर से वीरवार को हाईकोर्ट में पेश की गई। आदेश में सदस्य सचिव से अनुरोध किया गया है कि वह परामर्शदाताओं की नियुक्ति के लिए आवश्यक कार्रवाई करें और यदि परामर्शदाताओं की नियुक्ति के लिए नियमों और शर्तों और वित्तीय निहितार्थों के संबंध में सरकार से कोई स्पष्टीकरण चाहिए तो एक प्रस्ताव भेजें।
अपने आदेश में हाईकोर्ट की तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी की खंडपीठ ने पंजाब और हरियाणा के गृह विभागों को अनुबंध के आधार पर हर जिले में तीन-तीन काउंसलर नियुक्त करने का निर्देश दिया था, ताकि पुलिस स्टेशनों के स्तर पर वैवाहिक विवादों से उत्पन्न होने वाली आपराधिक शिकायतों को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल किया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने यह निर्देश जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, यूटी, चंडीगढ़ में काउंसलर की नियुक्ति को ध्यान में रखते हुए दिया था, जिसने पुलिस स्टेशनों/अदालतों में लंबित शिकायतों के संबंध में एक वर्ष की अवधि के भीतर 700 मामलों का समाधान किया था। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लेते हुए यह आदेश पारित किए थे। हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों को चंडीगढ़ माडल का अनुसरण करने का आदेश दिया था।