हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि एचएसएससी के चेयरमैन भारती को निलंबित करना सरकार का अंगुली कटा कर शहीद होने का स्वांग करने के समान है। एचएसएससी में जो कुछ होता रहा, उसके सूत्रधार स्वयं सत्ताधारी हैं। इसलिए वह उच्च न्यायालय के कार्यरत न्यायाधीश की जांच से बच रहे हैं, ताकि सच्चाई सामने न आ सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि कमीशन में धड़ल्ले से पैसे पर नौकरियां बेची जाती रही हैं। प्रदेश के ब्राह्मण समाज के आक्रोश को भांप कर प्रकाशक को काली सूची में डालने, परीक्षक को प्रतिबंधित करने व माफी मांगने मात्र से एचएसएससी पाक साफ नहीं हो जाता।
कांग्रेस पार्टी की मांग है कि सरकार एचएसएससी के गठन से लेकर अब तक बेची गई नौकरियों समेत संपूर्ण कामकाज में चेयरमैन की संलिप्तता व सरकार के रोल की जांच उच्च न्यायालय के कार्यरत न्यायाधीश से करवाए व भारती को निलंबित करने की बजाए बर्खास्त किया जाए।
हुड्डा ने कहा कि सरकार का यह बहुत ही विचित्र निर्णय है कि किसी चेयरमैन का निलंबन हो रहा है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री स्वयं भारती को क्लीन चिट दे रहे हैं तो कोई अधिकारी चाहे वो कितने ही ऊंचे पद पर हो, उसकी निष्पक्ष जांच कैसे होगी।
हुड्डा ने कहा कि एचएसएससी में एक के बाद तीन प्रकरण ऐसे सामने आए, जिसमें चेयरमैन की भूमिका संदिग्ध रही है। पहले पेहवा नगरपालिका प्रधान की ताजपोशी के लिए पैसे का लेन देन, दूसरा कमीशन द्वारा की जाने वाली भर्तियों में भारी गोलमाल व तीसरे जेई की लिखित परीक्षा में ब्राह्मण समाज के बारे में अपमानजनक प्रश्न पूछना व इतना कुछ होने के बाद भी मुख्यमंत्री द्वारा चेयरमैन को क्लीन चिट देना यह दर्शाता है कि एचएसएससी में जो कुछ हुआ वो सरकार की जानकारी में हुआ।