हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : फाइल फोटो
10 हजार करोड़ के वैट घोटाले में बड़ी कार्रवाई की गई है। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी। हरियाणा के दस जिलों में हुए इस घोटाले के मामले में वीरवार को हरियाणा सरकार ने ईडी को दर्ज की गई 24 एफआईआर की जानकारी दी है। यह सभी एफआईआर दो जिलों में ही दर्ज की गई हैं।
पिछली सुनवाई के दौरान ईडी ने हाईकोर्ट में शिकायत की थी कि मामले की जांच में हरियाणा सरकार सहयोग नहीं कर रही है। इस बीच, हरियाणा राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन ने भी इस मामले में हाईकोर्ट में अर्जी देकर प्रतिवादी बनाने की मांग की है। हाईकोर्ट ने ईडी द्वारा पेश स्टेटस रिपोर्ट को रिकार्ड पर लेते हुए मामले की सुनवाई 20 सितंबर तक स्थगित कर दी।
पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से वैट घोटाले से जुड़ा सारा रिकार्ड सील करने का निर्देश दिया था। इस मामले में याचिकाकर्ता ने सीबीआई जांच की मांग की है, जिस पर हाईकोर्ट ने सीबीआई व ईडी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिकाकर्ताओं के वकील प्रदीप रापरिया की ओर से कहा गया है कि एसआईटी लोकायुक्त ने भी यह आरोप लगाया है कि मौजूदा अतिरिक्त मुख्य सचिव घोटाले की जांच का काम केवल एक जिले तक सीमित करके जांच में रुकावट पैदा कर रहे हैं। वहीं, सरकार की ओर से कहा गया कि डिफाल्टर व्यापारियों से 2000 करोड़ रुपये से अधिक उगाहे गए हैं।
हरियाणा में वर्ष 2004 से चर्चित वैट घोटाले की जांच हाईकोर्ट के आदेश पर विशेष रूप से गठित कमेटी ने की थी। इस जांच में 10000 करोड़ के घोटाले का खुलासा हुआ था और इसमें अनेक बड़े व्यापारियों और बिल्डरों के शामिल होने के संकेत मिले थे। लेकिन जांच कमेटी की रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो राजस्थान और हरियाणा के दो लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की सीबीआई और इडी से जांच करवाने और घोटाले में शामिल लोगो के नाम सार्वजानिक करने की मांग की थी।