प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के बजट के दुरुपयोग की बात सामने आई है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है। हरियाणा में यह मामला सामने आया। पता चला है कि बजट से राज्य सरकार ने लैपटॉप बैग और मग खरीद लिए। यह खुलासा कैग की रिपोर्ट में हुआ है। प्रदेश की प्रधान महालेखाकार ऑडिट महुआ पाल ने प्रेसवार्ता में बताया कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के बजट का भी दुरुपयोग हुआ है।
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इस मद के 21.24 लाख रुपये से 18 सौ लैपटॉप बैग और 29 सौ मग खरीद लिए गए। जबकि योजना में इनकी खरीद का कोई प्रावधान ही नहीं था। साथ ही योजना के शुभारंभ अवसर पर पानीपत में तीन लाख रुपये का अपव्यय थीम गेट बनाने पर कर दिया गया। महुआ पाल ने बताया कि राजकोषीय घाटा साल 2011-12 में राजस्व घाटा 1457 करोड़ था, 2012-13 में यह बढ़कर 4438 करोड़ हुआ, 2013-14 में कमी आई और यह 3875 करोड़ हो गया।
हालांकि साल 2014-15 में भारी इजाफे के साथ 8319 करोड़ और 2015-16 में 11679 करोड़ तक पहुंच गया। उन्होंने बताया कि कैग रिपोर्ट के आधार पर राजकोषीय घाटा साल 2011-12 में 7153 करोड़ था, 2012-13 में 10362 करोड़ पहुंचा, 2013-14 में कम होकर 8314 करोड़ आया, इसके बाद रफ्तार पकड़ी और 2014-15 में यह बढ़कर 12586 और 2015-16 में लगभग ढाई गुना बढ़कर 31 हजार 479 करोड़ हो गया।
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राजस्व और राजकोषीय घाटा पूर्ववर्ती सीएम हुड्डा के दूसरे कार्यकाल के अंतिम वर्ष 2013-14 में कम हुआ। इसके बाद सत्ता में आई खट्टर सरकार के कार्यकाल में यह काफी बढ़ा है। प्राथमिक घाटा भी बढ़कर 23195 करोड़ रुपये पहुंच चुका है। 2015-15 में यह 5658 करोड़ रुपये था। महुआ पाल ने कहा कि लोक लेखा समिति और सार्वजनिक उपक्रम समिति इस पर चर्चा कर सरकारों की जवाबदेही तय करती हैं। कार्रवाई की प्रक्रिया भले धीमी हो, लेकिन कैग रिपोर्ट पर प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।
घाटे में इजाफा खतरे की घंटी
Beti Bachao
वित्तीय वर्ष 2016 की कैग रिपोर्ट में राजस्व और राजकोषीय घाटे में इजाफे को खतरे की घंटी बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक राजस्व घाटा जो साल 2011-12 के दौरान शून्य तक लाया जाना था और 2014-15 तक इसे शून्य बनाए रखना था, लगातार बढ़ता गया। राजकोषीय घाटे की स्थिति भी यही है। राजकोषीय घाटे के बढ़ने के पीछे भारी-भरकम गैर योजनागत व्यय को माना जा रहा है।
इन गैर सार्वजनिक उपक्रमों में भारी अनियमितताएं
राज्य कृषि विपणन बोर्ड
. दीर्घावधि योजनाआं की कमी और त्रुटियों से समग्र लक्ष्यों में गिरावट
. निधियों को बचत बैंक खातों में रखने से छह करोड़ के ब्याज का घाटा
. 38 मार्केट कमेटियों को प्रदान नहीं की मूलभूत सुविधाएं
. अयोग्य लाइसेंस धारकों को रिजर्व मूल्य पर आवंटित किए प्लॉट, 1.82 करोड़ की हानि
. दुकानों-बूथों के बेसमेंट और ऊपरी मंजिल के अनियमित निर्माण पर 2.39 करोड़ की पेनाल्टी नहीं लगाई
इन मदों में भी हुआ दुरुपयोग
beti bachao beti padhao
पीजीआई रोहतक
. मास्टर तथा वार्षिक योजनाएं तैयार नहीं
. खरीद में देरी तथ अप्रचलित उपकरणों से चिकित्सा सेवाएं व शैक्षणिक कार्य बुरी तरह प्रभावित
. प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, जलने से घाव की रोकथाम के पायलट पोजेक्ट धीमी गति से लागू किए
आरटीई
. छह से चौदह साल आयु के बच्चों की पहचान के लिए घरेलू सर्वेक्षण नहीं किया गया। बच्चों की गणना केवल अनुमान पर ही आधारित।
. स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव
. पाठ्य पुस्तकें, वर्दी, लेखन सामग्री व बस्ते देने में देरी
. 2011 से 16 के दौरान 514 से 821 गैर मान्यता प्राप्त स्कूल कार्यरत
खाद्य एवं औषधि प्रबंध विभाग
. न तो खाद्य व्यापार संस्थाओं को पहचानने के लिए सर्वेक्षण किया, न डाटाबेस बनाया
. खाद्य प्रयोगशालाएं नमूनों के परीक्षण के लिए आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित नहीं
औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग
. आईटीआई को अपग्रेड करने में विफल, फैकल्टी की कमी
. कौशल विकास की कमी के कारण खराब शैक्षणिक स्थिति
. मान्यता के लक्ष्य प्राप्त नहीं, सफलता प्रतिशत कम
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग
. निवेश प्रोत्साहक स्कीमों का क्रियान्वयन अयोग्य मदों में किया गया
. विभाग ने दस साल में केवल पांच औद्योगिक इकाईयों को ही ब्याजमुक्त ऋण के अधीन वित्तीय सहायता दी
चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग
. महाराजा अग्रसेन मेडिकल कालेज ने एजेंसी का विश्वसनीयत और कार्य अनुभव बिना ही चयन किया। इससे दो करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ।
लोक निर्माण विभाग
. बिलों में मात्रा का सत्यापन किए बिना बिटुमेन की गलत दरें दस एजेंसियों को दीं। सरकार को 117 करोड़ की चपत
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
. साइंस सिटी की स्थापना के लिए मौलिक आवश्यकताएं सुनिश्चित किए बिना 14.66 करोड़ खर्चे। हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने दस करोड़ 37 लाख अभी तक सरकारी खाते में जमा नहीं कराए।
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग
. विनियमों के अनुसार भूमि की कीमत में अनार्जित वृद्घि का निर्धारण किए बिना ही भूमि पट्टे पर देने से 417.15 करोड़ का घाटा।
महिला एवं बाल विकास विभाग
. विधवाओं तथा निराश्रित महिलाओं के गृहों भारी कमियां
. कस्तूरबा सेवा सदन फरीदाबाद में प्रवेश बंद, 18 जिलों में नया कोई गृह नहीं
. विभाग ने 2011 से 16 तक वेतन भत्तों पर साढे छह करोड़ तो निराश्रित महिलाओं को वित्तीय सहायता सिर्फ 95 लाख की दी। स्कीम का कम प्रचार किया गया