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हरियाणाः बिजली चुराने वालों को बख्शने के मूड में नहीं सरकार, 6 साल में दो लाख एफआईआर

Fri, 17 Jan 2020 11:19 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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हरियाणा में बिजली चोरी को लेकर सरकार और सख्ती के मूड में है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि बिजली चोरी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसी के चलते बिजली चोरी करने वालों के खिलाफ और सख्ती के निर्देश दिए गए हैं। इसी के तहत अब प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली चोरी के संदर्भ में छापेमारी अभियान और तेज होने वाला है।
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बिजली मंत्री रणजीत चौटाला भी पिछले दिनों स्पष्ट कर चुके हैं कि वीआईपी हो या आमजन बिजली चोरी करते हुए कोई भी पकड़ा गया, तो उसे किसी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा। पिछले दिनों बिजली मंत्री ने अपने निरीक्षण के दौरान पानीपत थर्मल प्लांट के अफसरों को बिजली चोरी करते हुए पकड़ा था।

इसके अलावा हरियाणा बिजली विनायम आयोग के चेयरमैन डीएस ढेसी भी इस मुद्दे को लेकर खासे गंभीर हैं। वे भी फील्ड में विभिन्न दौरों के साथ बिजली निगमों के अफसरों को इस तरह के लाइन लॉसिस पर नकेल कसने के निर्देश दे चुके हैं।
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रोजाना दर्ज हुई औसतन 95 एफआईआर
हरियाणा सरकार कार्यकाल के दौरान बिजली चोरी रोकने को लेकर शुरू से ही संजीदा और सख्त दिखाई दी। इसी का नतीजा यह रहा कि छह साल में बिजली का लाइन लॉस भी शानदार ढंग से कम हुआ। साढ़े छह साल की स्थिति देखें तो इस अवधि में 2434 दिनों में 232416 बिजली चोरी की एफआईआर दर्ज की गई। यानि औसतन 95 एफआईआर बिजली चोरी की रोजाना दर्ज हुई।

हरियाणा में बिजली निगमों ने 2013 में बिजली चोरी की 16490 एफआईआर दर्ज करवाई, तो वहीं 2014 में 9239 एफआईआर, 2015 में 16095 एफआईआर, वर्ष 2016 में 22633 एफआईआर, वर्ष 2017 में 95407 एफआईआर , वर्ष 2018 में 55225 एफआईआर और अगस्त 2019 तक 17327 एफआईआर दर्ज हुई। ये एफआईआर इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा-135 के तहत दर्ज की गई।
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सख्ती का असर, लाइन लॉस 14 प्रतिशत तक कम हुआ

बिजली चोरी को लेकर ये सरकार की सख्ती का ही असर है कि प्रदेश में बिजली का लाइन लॉस काफी हद तक कम हुआ है। जबकि बिजली मंत्री रणजीत चौटाला कहते हैं कि ये लाइन लॉस अभी और कम करने का टारगेट है। जबकि एचईआरसी के चेयरमैन डीएस ढेसी भी इसी पर फोकस करते हुए एग्रीगेट ट्रांसमिशन एंड कामर्शियल लॉस (एटी एंड सी) की जानकारी बिजली निगम अफसरों से ले रहे हैं।

दरअसल, बिजली चोरी की वजह से लाइन लॉस सबसे ज्यादा होता है। जिस वजह से न केवल बिजली की निर्बाध सप्लाई प्रभावित होती है, बल्कि बिजली निगमों को राजस्व नुकसान भी होता है। लाइन लॉस की स्थिति पर यदि नजर डालें तो वित्त वर्ष 2014-15 में हरियाणा में बिजली का लाइन लॉस 29.98 प्रतिशत था। मगर वर्ष 2015-16 में ये लाइन लॉस और बढ़कर 30.02 प्रतिशत हो गया।

सरकार ने और सख्ती की, तो वर्ष 2016-17 में लाइन लॉस 25.43 प्रतिशत तक पहुंचा, वर्ष 2017-18 में ये और कम होक र 20.29 प्रतिशत, वर्ष 2018-19 में 17.45 प्रतिशत और वर्ष 2019-20 में अभी तक 15 प्रतिशत के आसपास पहुंच गया है। यानी पिछले चार साल से लाइन लॉस लगातार घट रहा है, जो कि  बिजली निगमों के लिए अच्छी बात है।
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