हरियाणा सरकार ने 319 कानूनों व अधिनियम में जेल भेजने का प्रावधान हटाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसमें छोटे अपराधों में जेल भेजने की बजाय अर्थ दंड लगाने व सामुदायिक सेवा करने का प्रावधान करने का प्रस्ताव है। मुख्य सचिव संजीव कौशल ने शुक्रवार को इस संबंध में संबंधित विभागों के प्रशासनिक सचिव के साथ बैठक की। उन्होंने सभी सचिवों को 319 कानूनों व अधिनियमों की समीक्षा करने और 15 दिन में इसकी रिपोर्ट देने के निर्देश दिया।
इन 319 कानूनों व अधिनियमों में अधिकतर उद्योगों से जुड़े हैं। मुख्य सचिव ने बताया कि सरकार का उद्देश्य कानूनों व अधिनियमों को अपराधमुक्त कर कारोबार सुगमता का माहौल बनाना और लोगों व उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम करना है। प्राथमिक लक्ष्य इन कानूनों के छोटे-मोटे उल्लंघनों के लिए एफआईआर दर्ज करने, लोगों को जेल भेजने और उन पर मुकदमा चलाने से बचना है। साथ ही अनुपालन को सरल, डिजिटल, अपराधमुक्त व तर्कसंगत बनाना है। उन्होंने बताया कि अधिनियमों को अपराधमुक्त करने की शुरुआत से अब तक हरियाणा ने 500 से अधिक अनुपालनों का बोझ कम किया है।
मुख्य सचिव ने बताया कि मौजूदा कानून में छोटे और प्रक्रियागत चूक में कम जुर्माने व अर्थदंड के साथ जेल की सजा का भी प्रावधान है। इससे खासकर कारोबारियों में अविश्वास और भय पैदा होता है। इन बदलावों का मकसद अनावश्यक रूप से सजा न देना और जरूरत पड़ने पर ज्यादा अर्थदंड लगाना और सामुदायिक सेवा करने का प्रावधान होगा।