सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि अगर कोई जनसूचना अधिकारी बकाया राशि जमा कराए बिना सेवानिवृत्त हो जाता है तो उसकी पेंशन से रिकवरी की जाएगी। संबंधित विभाग के सक्षम प्राधिकारी सेवानिवृत्त जनसूचना अधिकारियों को तब तक अंतिम वेतन प्रमाण पत्र व नो ड्यूज प्रमाण पत्र जारी नहीं करेंगे जब तक बकाया जुर्माना राशि की पूरी रिकवरी नहीं हो जाती।
सरकार के निर्देशों को रद्दी की टोकरी में डाल रहे विभाग
सरकार के संज्ञान में आया है कि विभाग समय-समय पर जारी निर्देशों को हल्के में ले रहे हैं। न तो निर्देशों पर अक्षरश: कार्रवाई हो रही है न ही विभागों की तरफ से कोई जवाब दिया जा रहा है। इस पर प्रशासन सुधार विभाग ने स्पष्ट किया कि ऐसे विभागों की सूची भी तैयार हो रही है। सरकार उन विभागाध्यक्षों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी जो लगातार निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं।
अवर सचिव ने पत्र लिखकर चेताया
जनसूचना अधिकारियों से तुरंत रिकवरी शुरू करने को लेकर प्रशासनिक सुधार विभाग की अवर सचिव संतोष कुमारी ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, सभी बोर्ड, निगमों के प्रबंध निदेशकों, मुख्य प्रशासकों, सभी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को पत्र लिखा है। जिसमें रिकवरी न होने पर आहरण एवं वितरण अधिकारियों पर कार्रवाई की सूचना के साथ अन्य जरूरी हिदायतें जारी की गई हैं।
लोकायुक्त कोर्ट में दायर हो चुका केस
1726 डिफाल्टर जनसूचना अधिकारियों से करोड़ों रुपये की जुर्माना वसूली के लिए लोकायुक्त कोर्ट में केस दायर हो चुका है। पानीपत के आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने यह केस कुछ माह पहले दायर किया है। डिफाल्टर जनसूचना अधिकारियों में कई एचसीएस भी शामिल हैं। इन्होंने राज्य सूचना आयोग द्वारा लगाए गए जुर्माने की राशि कई वर्षों से जमा नहीं कराई है। न तो समय पर इन्होंने सूचना दी न जुर्माना दिया।